वाराणसी। पाण्डेयपुर स्थित ESIC मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से एक महिला का शव परिजनों द्वारा ले जाने का मामला लगातार चर्चा में है। इस प्रकरण में पुलिस, अस्पताल प्रशासन और परिजनों के अलग-अलग दावे सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
परिजनों के अनुसार, महिला को अस्पताल में भर्ती कर जांच की गई और बाद में मृत घोषित किया गया। डॉक्टरों ने इसे पुलिस केस बताते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने पर पोस्टमार्टम को लेकर बातचीत हुई, लेकिन परिजनों ने स्वेच्छा से पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद लिखापढ़ी की प्रक्रिया के दौरान वे शव लेकर चले गए।
वहीं, इंस्पेक्टर राम रूप के अनुसार, अस्पताल की ओर से शव को लिखित रूप से पुलिस के सुपुर्द नहीं किया गया था।
इस बीच ESIC मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार:
- महिला ESIC की IP (Insured Person) मरीज नहीं थी।
- अस्पताल में पोस्टमार्टम नहीं किया जाता है।
- अस्पताल का आरोप है कि एक पुलिस कांस्टेबल ने परिजनों को शव घर ले जाने के लिए उकसाया।
- अस्पताल का यह भी कहना है कि जब स्टाफ ने रोकने का प्रयास किया तो परिजन आक्रामक हो गए और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की आशंका के कारण उन्हें बलपूर्वक नहीं रोका गया।
इन तमाम बयानों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मौके पर पुलिसकर्मी, डॉक्टर और अस्पताल के सुरक्षा कर्मी मौजूद थे, तो शव अस्पताल से बाहर कैसे चला गया। साथ ही, यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा परिजनों को शव ले जाने के लिए उकसाने का आरोप सही है, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
फिलहाल इस मामले में कई पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्तर पर चूक हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
