वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान ने नीट-यूजी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे गंभीर और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक श्रेय की होड़ का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार के उद्देश्य से शुरू हुआ छात्र आंदोलन यदि पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लेता है, तो मूल मुद्दा पीछे छूटने का गंभीर खतरा है।
मुसरफ खान ने आगे कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना आज देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की बढ़ती होड़ और सड़क से संसद तक जारी राजनीतिक टकराव से शिक्षा सुधार का वास्तविक उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर राजनीति नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
उन्होंने देश के छात्र-छात्राओं और युवाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के बहकावे, भड़काऊ संदेश, अफवाह या उकसावे में न आएं। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके भविष्य को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक स्वार्थ की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाना चाहिए। किसी भी संदेश या दावे पर विश्वास करने से पहले उसके तथ्यों की स्वयं जांच करना और विवेकपूर्ण निर्णय लेना जरूरी है।
श्री ख़ान ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे अपने माता-पिता के सपनों, अपनी शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने युवाओं से कानून का सम्मान करते हुए शांति, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन या गतिविधि में शामिल होने से पहले उसके संभावित परिणामों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि गलत कदम का असर सीधे छात्र के भविष्य और परिवार पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं पर सभी को गर्व है। यही युवा भारत का वर्तमान भी हैं और भविष्य भी इसलिए आवश्यक है कि वे संयम, विवेक और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें तथा अपनी ऊर्जा को शिक्षा, ज्ञान, कौशल और राष्ट्र निर्माण में लगाएं।
आखिर में वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान ने देशहित में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में खामियों को दूर करना किसी एक दल या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की साझा जिम्मेदारी है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन विद्यार्थियों एवं युवाओं के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सभी पक्षों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाधान की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।
रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
