वृन्दावन। पत्थरपुरा स्थित श्रीगोपालजी मन्दिर (श्री माध्वगौड़ेश्वर आश्रम) में श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज का 20वां त्रिदिवसीय वार्षिक तिरोभाव महोत्सव विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ धूमधाम से प्रारम्भ हो गया है।सर्वप्रथम श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज के चित्रपट का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया।साथ ही उनका पावन स्मरण किया गया।
तत्पश्चात आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए चतु:सम्प्रदायाचार्य के श्रीमहंत फूलडोल बिहारीदास महाराज वश्रीमहंत लाड़िली शरण महाराज ने कहा कि श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज गौडीय सम्प्रदाय की बहुमूल्य निधि थे। उन्होंने अपने सम्प्रदाय का संवर्धन करने के लिए अनेकों ठोस कार्य किए। जिस पर गौडीय सम्प्रदाय आज भी गर्व की अनुभूति करता है।
श्रीउमा शक्ति पीठाधीश्वर दण्डी स्वामी रामदेवानंद सरस्वती महाराज व सिंहपौर हनुमान मंदिर के महंत सुंदरदास महाराज ने कहा कि श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज श्रीधाम वृन्दावन के प्राचीन स्वरूप के परिचायक थे। उन्होंने श्रीधाम वृन्दावन में साधनारत रहकर श्रीराधाकृष्ण की कुंज लीलाओं का दर्शन किया था।
आश्रम के अध्यक्ष महामंडलेश्वर सच्चिदानंद दास शास्त्री महाराज ने कहा कि हमारे सदगुरुदेव श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज जैसी पुण्यात्माएं पृथ्वी पर कभी कभार ही अवतरित होती हैं। उन जैसी विभूतियों से ही पृथ्वी पर धर्म व अध्यात्म का अस्तित्व है।
प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी व प्रमुख समाजसेवी पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज परम भजनानंदी व वीतरागी संत थे।वह अपनी मात्र तीन वर्ष की अवस्था में ही श्रीधाम वृन्दावन आ गए थे। यहां उन्होंने अपनी सौ वर्ष की अवस्था तक आजीवन अखंड वास किया।
महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद गिरि महाराज व महंत आचार्य रामदेव चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज नाम निष्ठ व धाम निष्ठ संत थे। वे सहजता, सरलता, उदारता व परोपकारिता की प्रतिमूर्ति थे।
महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज व महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सत्यानंद सरस्वती महाराज (अधिकारी गुरुजी) ने कहा कि श्रीमहंत अच्युतानंद दास महाराज संत समाज के गौरव थे।सभी संप्रदायों के संत उनका सम्मान करते थे।
सन्त सम्मेलन में महामंडलेश्वर स्वामी नवल गिरि महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी चित्त प्रकाशानंद महाराज, परम् हितधर्मी डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा, डॉ. हरे कृष्ण "शरद", महंत दशरथ दास महाराज, तपेश पाठक, महंत डॉ. सत्यनारायण दास, महंत ब्रज बिहारी महाराज (चार सम्प्रदाय आश्रम), महंत जगन्नाथ दास शास्त्री, संत राम दास महाराज एवं भागवताचार्य गोपाल भैया आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।संचालन सन्त सेवानंद ब्रह्मचारी ने किया।महोत्सव के अंतर्गत ठाकुर श्रीगोपालजी महाराज का भव्य व दिव्य फूल बंगला सजाया गया।
महोत्सव के अंतिम दिन महंतों, विप्रों आदि का सम्मान एवं संत ,ब्रजवासी, वैष्णव सेवा व वृहद भंडारा हुआ। जिसमें हजारों व्यक्तियों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853
