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- जर्जर तहसील भवन बना खतरा, वकीलों ने प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप
- दो साल से मरम्मत का इंतजार, रौन अभिभाषक संघ ने उठाए सवाल
- 10 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद नहीं शुरू हुआ मरम्मत कार्य
- मंत्री को अवगत कराने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, वकीलों में नाराजगी
- रौन तहसील भवन की बदहाल हालत, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
मध्य प्रदेश के भिंड जिले की रौन तहसील में जर्जर सरकारी भवन एक बार फिर चिंता का कारण बन गया है। तहसील भवन की छत से प्लास्टर गिरने की घटना के बाद बड़ा हादसा टल गया। अभिभाषक संघ ने प्रशासन पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाते हुए तत्काल मरम्मत की मांग की है।
रौन तहसील भवन की छत से अचानक प्लास्टर गिरने से परिसर में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने भवन की जर्जर स्थिति को उजागर कर दिया है।
रौन अभिभाषक संघ के वकीलों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से तहसील भवन की मरम्मत का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। उनका कहना है कि हर बार केवल वादे किए गए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वकीलों के अनुसार, नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों को कई बार भवन की खराब हालत से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि अभिभाषक संघ के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत होने की जानकारी मिली थी और कुछ स्थानों पर गड्ढे भी खोदे गए, लेकिन निर्माण या मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया।
अभिभाषक संघ ने बताया कि हाल ही में क्षेत्रीय मंत्री राकेश शुक्ला को भी तहसील भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया गया था। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। देखे विमलेश की रिपोट
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