पिछोर। 25 करोड़ रुपये की जल आवर्धन योजना... 8 साल का इंतजार... और आज भी पानी के लिए तरसता पिछोर। आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता की प्यास क्यों नहीं बुझी? कंपनी और नगर पालिका आमने-सामने हैं, लेकिन परेशान सिर्फ आम जनता है।
वर्ष 2017 में पिछोर नगर के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से जल आवर्धन योजना शुरू की गई थी। दावा किया गया था कि दो साल के भीतर हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा। लेकिन करीब 8 साल बीत जाने के बाद भी योजना अधूरी है और नगर के कई इलाकों में पानी की समस्या बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार योजना संचालित करने वाली रियान (रेहान) वॉटर सप्लाई कंपनी पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। बताया जा रहा है कि भुगतान नहीं होने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हो रही है और नगर की कई पानी की टंकियां खाली पड़ी हैं।
प्लांट मैनेजर सुधीर का कहना है कि बिजली बिल का भुगतान नगर पालिका करेगी। वहीं प्रभारी सीएमओ दीपक बनाफर का कहना है कि कंपनी ने अभी तक योजना पूरी कर नगर पालिका को हैंडओवर नहीं किया है, इसलिए नगर पालिका बिल का भुगतान नहीं करेगी।
अब सवाल यह है कि जब कंपनी और नगर पालिका एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, तो आखिर पिछोर की जनता को राहत कौन देगा? करोड़ों रुपये की इस योजना का हिसाब कौन देगा? और आखिर कब तक पानी के लिए भटकते रहेंगे पिछोर के लोग? देखे राजू जाटव की रिपोट

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