श्रीमद्भागवत कथा में सजी श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
मंगल गीतों और वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुआ भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का दिव्य विवाह
भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव ने बांधा समां, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हुआ श्री सांई धाम
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी लालगंज, प्रतापगढ़। राहाटीकर के समीप रामपुर कसिहा स्थित श्री सांई धाम मंदिर में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दौरान मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी का दिव्य विवाहोत्सव श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ।विवाहोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भव्य मंडप में वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार, मंगल गीतों और शंखनाद के बीच भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह की मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरे परिसर में "जय श्रीकृष्ण", "रुक्मिणी वल्लभ भगवान की जय" और "हरि बोल" के जयघोष गूंजते रहे। कथाव्यास उदासीन संप्रदाय, हिमाचल प्रदेश से पधारे स्वामी निर्वाण कर्णदास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि माता रुक्मिणी की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण सच्ची भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब भक्त का विश्वास अडिग होता है, तब स्वयं भगवान उसकी रक्षा और कल्याण के लिए आगे आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और मानवता के कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवारों में धार्मिक संस्कार, नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक वातावरण की आवश्यकता पहले से अधिक है। श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, सेवा, प्रेम और सदाचार के मार्ग पर चलाने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ज्ञान है।कथावाचक शम्भूनाथ योगी जी महाराज ने भी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का महत्व बताया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर भजन-कीर्तन करते रहे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर दिव्य युगल का स्वागत किया। विवाह की रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गईं, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक आनंद से भर उठा। आयोजन के संयोजक समाजसेवी संजय ने बताया कि श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए आगामी कथा प्रसंगों में भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की। कार्यक्रम के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी की भव्य महाआरती हुई, जिसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। देर शाम तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा। इस अवसर पर गंगापाल सिंह तोमर, जय सिंह, जगदीश नारायण मिश्र, डॉ. अशोक सिंह, महेंद्र सिंह सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, महिला श्रद्धालु, युवा एवं हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
