श्री विष्णु महायज्ञ में उमड़ी आस्था, भक्त प्रह्लाद की कथा ने बांधा समां
श्री विष्णु महायज्ञ में गूंजे वेद मंत्र, भक्त प्रह्लाद की अमर भक्ति का संदेश सुन झूम उठे श्रद्धालु
प्रह्लाद की भक्ति और भगवान नृसिंह के प्राकट्य की कथा से गूंजा साई धाम, श्रद्धा में डूबे हजारों श्रद्धालु
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। जनपद के टीकर क्षेत्र स्थित साई धाम मंदिर, रामपुर कसिहा राहा में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत महापुराण कथा इन दिनों पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना रही है। वैदिक मंत्रों की गूंज, हवन की पावन सुगंध और श्रीहरि के जयघोष से मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर है। दूर-दराज के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण और यज्ञ में आहुति देने के लिए पहुंच रहे हैं। धार्मिक आयोजन का शुभारंभ 2 जुलाई को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ था। इसके बाद वैदिक आचार्यों ने शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि प्रज्वलित कर श्री विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ कराया। यज्ञशाला में प्रतिदिन सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक हवन, यज्ञ, पूजन एवं अन्य वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। श्रद्धालु यज्ञ कुंड में आहुति अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, समाज में शांति तथा विश्व कल्याण की कामना कर रहे हैं। महायज्ञ के साथ चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में कथावाचक ने शनिवार को भक्त प्रह्लाद की अमर भक्ति और भगवान नृसिंह अवतार का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से की गई ईश्वर भक्ति के सामने संसार की कोई भी शक्ति टिक नहीं सकती। भक्त प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों और अनेक यातनाओं के बावजूद भगवान विष्णु का नाम नहीं छोड़ा। अंततः भगवान श्रीहरि ने नृसिंह अवतार धारण कर अपने परम भक्त की रक्षा की और अधर्म तथा अहंकार का अंत किया। कथावाचक ने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, जबकि भक्ति, विनम्रता, सत्य और धर्म जीवन को सफल बनाते हैं। भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और जो व्यक्ति सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन की कठिन से कठिन बाधाएं भी दूर हो जाती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सदाचार, सेवा, करुणा, माता-पिता का सम्मान और भगवान के प्रति अटूट आस्था बनाए रखने का संदेश दिया। कथा के दौरान भगवान श्रीहरि विष्णु के जयघोष, हरि-कीर्तन और भजन संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से कथा श्रवण करते रहे। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, बच्चों ने भगवान के जयकारे लगाए और उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन होकर भगवान का स्मरण करते रहे।आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से महायज्ञ की 108 परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 8 जुलाई तक चलेगा। समापन दिवस पर महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम होगा। इसके अगले दिन 9 जुलाई को क्षेत्र के 64 गांवों के श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर पेयजल, बैठने की समुचित व्यवस्था, प्रसाद वितरण, वाहन पार्किंग तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर यज्ञ, कथा एवं भंडारे में सहभागी बनने तथा धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की। पूरे आयोजन में ग्रामीणों, युवाओं और स्वयंसेवकों का सहयोग भी सराहनीय बना हुआ है।यदि यह समाचार चैनल न्यूज के लिए है, तो इसे और अधिक दमदार व टीवी रिपोर्टिंग शैली में भी तैयार किया जा सकता है। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
