ई-रजिस्ट्री और निजीकरण के विरोध में उतरे कसया के अधिवक्ता, अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरूकसया (कुशीनगर):
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था और निबंधन विभाग के कथित निजीकरण के फैसले के खिलाफ स्थानीय अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों का गुस्सा फूट पड़ा है। 'अधिवक्ता एसोसिएशन कसया व मुंशियान संघ' तथा 'स्टांप वेंडर संघ' के संयुक्त तत्वावधान में तहसील परिसर में एक विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान आंदोलित कर्मियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए इस नई नीति को वापस लेने की मांग की
आजीविका पर संकट का आरोपधरना स्थल पर मौजूद वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा जमीनों की खरीद-फरोख्त और बैनामों के डिजिटलाइजेशन व ई-रजिस्ट्रीकरण का जो फैसला लिया गया है, वह पूरी तरह जनविरोधी है। इस नई ऑनलाइन व्यवस्था के आने से तहसील परिसर में वर्षों से काम कर रहे हजारों अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों (कातिब), स्टांप विक्रेताओं और मुंशियों के सामने अचानक रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
आम जनता को होगी परेशानीअधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों का तर्क है कि पूरी तरह से ऑनलाइन और निजी हाथों में जाने वाली यह व्यवस्था ग्रामीण व कम पढ़े-लिखे नागरिकों के लिए बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है। इससे न केवल दस्तावेजी त्रुटियां और धोखाधड़ी के मामले बढ़ेंगे, बल्कि आम जनता का आर्थिक शोषण भी होगा।।
प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि जब तक उत्तर प्रदेश सरकार इस 'काले कानून' और रजिस्ट्री के निजीकरण वाले प्रस्ताव को तत्काल वापस नहीं लेती, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक आंदोलन और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन में कसया बार एसोसिएशन से जुड़े तमाम वरिष्ठ अधिवक्ता, मुंशी और बड़ी संख्या में स्टांप वेंडर उपस्थित रहे देखे गोरखपुर से फूलमती की रिपोट
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