लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी आग की आंच गोरखपुर भी पहुंच गई है। टीमों का गठन कर जांच शुरू कर दी गई है लेकिन गिने-चुने सेंटरों में ही आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं। अधिकांश सेंटर भगवान भरोसे ही चल रहे हैं। इन सेंटरों में अगर कभी आग लगी तो लोगों की जान बचाना काफी मुश्किल होगा।
शहर में अधिकांश कोचिंग आवासीय क्षेत्रों में संचालित किए जा रहे हैं। संकरे रास्तों की वजह से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना भी आसान नहीं है। छात्रसंघ चौराहा, बेतियाहाता, देवरिया बाईपास रोड, बैंक रोड, मेडिकल कॉलेज रोड, मोहद्दीपुर जैसे क्षेत्रों में बड़े कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
शहर में संचालित कई सेंटरों में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। प्रवेश और निकास का एक ही रास्ता, फायर फाइटिंग के काम चलाऊ इंतजाम डराने वाले हैं। बड़े कोचिंग संस्थानों का हाल कुछ ठीक है। यहां पर फायर फाइटिंग और प्रवेश-निकास के लिए अलग-अलग द्वार जैसी सुविधाएं हैं।
कुछ में आधुनिक अलार्म भी लगाए गए हैं। आकाश इंस्टीट्यूट में नीट की तैयारी कर रही साक्षी त्रिपाठी ने कहा कि सेंटर में पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं। मोमेंटम में पढ़ाई कर रहे छात्र नीरज गिरि ने कहा कि यहां पर डरने जैरी कोई बात नहीं है।
सिर्फ 82 कोचिंग सेंटर पंजीकृत, नहीं दे रहे जरूरी जानकारी
कोचिंग सेंटर संचालित करने के लिए उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। गोरखपुर कार्यालय में 82 कोचिंग सेंटर ही पंजीकृत हैं।
उच्च शिक्षा अधिकारी उदयभान ने बताया कि पंजीकरण और नवीनीकरण के समय ही संचालक मानक के अनुरूप सभी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि किसी के विरुद्ध अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि किसी कोचिंग संचालक को नोटिस भी नहीं भेजा गया है।
ये हैं मानक
कोचिंग सेंटर के संचालन के लिए गाइडलाइंस तय की गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार रेग्युलेशन ऑफ कोचिंग एक्ट-2002 में मानक तय किए गए हैं। एक्ट के मुताबिक संचालक को तय समय पर उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय को फीस, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं की संख्या व सेंटर के साइज आदि की जानकारी देना अनिवार्य है।
साथ ही कोचिंग सेंटर के निर्माण में नेशनल बिल्डिंग कोड का भी अनुपालन किया जाना है, जिसमें सीढि़यों की साइज, प्रवेश-निकास के रास्ते, अग्निशमन की सुविधा शामिल है।
अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता और व्यवस्था पर फोकस किया गया है ताकि संस्थान में सभी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके: डॉ. संजय पांडेय, सेंटर डायरेक्टर आकाश इंस्टीट्यूट मेडिकल कॉलेज रोड
विद्यार्थियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था है। शॉर्ट सर्किट की स्थिति में तत्काल बिजली की आपूर्ति स्वतः बाधित हो जाती है। अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं: संजीव कुमार, प्रबंध निदेशक मोमेंटम छात्रसंघ रिपोर्ट फूलमती मौर्य 151188511
