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योग दिवस पर सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना, कई शासकीय स्कूलों में लटके मिले ताले
  • 151173825 - RAJU JATAV 0 0
    21 Jun 2026 20:04 PM



जिम्मेदारों पर उठे सवाल, बीआरसी ने जांच और कार्रवाई का दिया आश्वासन


पिछोर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में योग कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को स्वस्थ जीवन का संदेश दिया गया, वहीं पिछोर नगर के कई शासकीय विद्यालयों में शासन के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी का मामला सामने आया है। योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति देखने पर कई सरकारी स्कूलों के मुख्य द्वारों पर ताले लटके मिले, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शासन द्वारा सभी शासकीय एवं अशासकीय शिक्षण संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के निर्देश जारी किए गए थे। निर्देशों के अनुसार विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सहभागिता से योग कार्यक्रम आयोजित किए जाने थे, लेकिन नगर के कई शासकीय विद्यालयों में न तो कोई कार्यक्रम आयोजित हुआ और न ही विद्यालयों में शिक्षक अथवा छात्र उपस्थित दिखाई दिए।
जानकारी के अनुसार नगर के मॉडर्न स्कूल एवं छत्रसाल महाविद्यालय में योग दिवस का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया, जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए योगाभ्यास किया। वहीं दूसरी ओर शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1, हरिजन बस्ती स्थित विद्यालय, शासकीय विद्यालय क्रमांक-2, गर्ल्स जूनियर स्कूल सहित कई अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों के मुख्य द्वार बंद मिले। निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर पूरी तरह सुनसान दिखाई दिए और कहीं भी योग दिवस कार्यक्रम के आयोजन के संकेत नहीं मिले।
सूत्रों के अनुसार कुछ शिक्षकों द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी देर से प्राप्त हुई थी। हालांकि विभागीय स्तर पर सभी विद्यालयों को एक साथ निर्देश जारी किए गए थे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अन्य विद्यालयों ने निर्देशों का पालन करते हुए योग दिवस मनाया, तो कुछ विद्यालय कार्यक्रम से पूरी तरह दूर क्यों रहे।
योग दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश देना है। इसके बावजूद कई विद्यालयों का बंद मिलना और कार्यक्रमों का आयोजन न होना प्रशासनिक लापरवाही तथा जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता की ओर संकेत करता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए और स्कूल बंद रहे, तो इसकी जवाबदेही तय होना चाहिए। लोगों ने मांग की है कि संबंधित विद्यालयों के प्रभारियों, शिक्षकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाए तथा दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।
इस पूरे मामले को लेकर जब पिछोर बीआरसी सुरेश शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि, "सभी स्कूलों में योग दिवस मनाया जाना चाहिए था। यदि कहीं कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है तो पूरे मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। संबंधित विद्यालयों को नोटिस जारी किए जाएंगे तथा नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाएगा। योग दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन पर हुई कथित लापरवाही ने शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और गंभीरता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। क्षेत्रवासियों की निगाहें अब प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। रिपोर्टर राजू जाटव पिछोर 



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