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शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही उजागर हुई अव्यवस्थाएं, कई स्कूलों में लटके मिले ताले, शिक्षक मोबाइल चलाते मिले
  • 151173825 - RAJU JATAV 0 0
    20 Jun 2026 18:38 PM



फास्ट न्यूज़ इंडिया मध्य प्रदेश शिवपुरी खनियाधाना। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही खनियाधाना विकासखंड की शासकीय शिक्षा व्यवस्था की हकीकत सामने आने लगी है। शासन और शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। विकासखंड के कई शासकीय विद्यालयों में निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक विद्यालय रामपुरा, शासकीय प्राथमिक विद्यालय कोयलन, शासकीय प्राथमिक विद्यालय हिम्मतपुर, शासकीय माध्यमिक विद्यालय सिनवाल कला, शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिनवाल कला, शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिनवाल खुर्द, शासकीय हाई स्कूल सिनवाल कला, शासकीय प्राथमिक विद्यालय कंचनपुर एवं शासकीय प्राथमिक विद्यालय दविया जगन में शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के बावजूद स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। कई विद्यालयों के मुख्य द्वार पर ताले लटके मिले, जबकि कुछ विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां नाममात्र की संचालित होती पाई गईं।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिन विद्यालयों में शिक्षक उपस्थित थे, वहां भी विद्यार्थियों की संख्या नगण्य रही। शासकीय प्राथमिक विद्यालय पठोंइया में एक शिक्षक विद्यालय समय में मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए मिले। जब उनसे विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने गर्मी का हवाला देते हुए कहा कि बच्चे स्कूल नहीं आए हैं। जबकि विद्यालय में लगभग 42 से 43 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और उन्हें विद्यालय तक लाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन कई स्कूलों में न तो नियमित पढ़ाई हो रही है और न ही विभागीय अधिकारी प्रभावी निगरानी कर रहे हैं। विद्यालयों में ताले लटके होने और शिक्षकों की लापरवाही से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
शिक्षा विभाग द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन शुरुआती दिनों में ही सामने आई इन अव्यवस्थाओं ने सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
क्या बोले बीआरसी
इस संबंध में जब बीआरसी संजय भदौरिया से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि, "ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। यदि कहीं इस प्रकार की अनियमितता सामने आई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। कोई भी विद्यालय बिना कारण बंद नहीं रह सकता। जांच में तथ्य सही पाए जाने पर संबंधितों को नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।"
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और लापरवाह शिक्षकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल शिक्षा सत्र के पहले ही सप्ताह में सामने आई इन अनियमितताओं ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
उपशीर्षक: शत-प्रतिशत उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों के बीच जमीनी हकीकत ने खोली विभागीय निगरानी की पोल। रिपोर्टर राजू जाटव पिछोर 



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