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यूपी, गोरखपुर, कुसम्ही बाजार । आमकोल गांव में यजमान गोबरी यादव द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वाराणसी से पधारे प्रख्यात कथावाचक भास्करधर दूबे ने श्रद्धालुओं को भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवत्कृपा किसी भी भाव में प्राप्त हो सकती है। यदि मन में सच्ची श्रद्धा और समर्पण हो तो भगवान अपने भक्तों पर अवश्य कृपा बरसाते हैं।
कथा के दौरान उन्होंने राजा बलि और भगवान वामन अवतार के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भगवान विष्णु वामन रूप धारण कर राजा बलि के यज्ञ में याचक बनकर पहुंचे, तब राजा बलि ने उनका सम्मानपूर्वक पूजन कर आगमन का उद्देश्य पूछा। इस पर भगवान वामन ने उनसे अपने चरणों से नापकर तीन पग भूमि दान में देने का आग्रह किया।
कथावाचक ने बताया कि राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें सावधान करते हुए कहा कि यह स्वयं भगवान विष्णु हैं और किसी उद्देश्य से आए हैं, इसलिए भूमि दान का संकल्प न करें। किंतु भक्त प्रह्लाद के पौत्र राजा बलि ने उत्तर दिया कि यह संसार ही क्षणभंगुर और मायामय है। यदि स्वयं सृष्टि के रचयिता भगवान मुझे छलने आए हैं तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है और उनके चरणों में समर्पण से मेरा कल्याण होगा। इसके बाद उन्होंने तीन पग भूमि दान करने का संकल्प ले लिया।
भास्करधर दूबे ने कहा कि राजा बलि का यह प्रसंग त्याग, समर्पण और अटूट भक्ति का अनुपम उदाहरण है, जो हमें भगवान के प्रति पूर्ण विश्वास रखने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर कथा आचार्य पंडित श्रवण ओझा, सह-आचार्य पंडित कृष्ण गोपाल ओझा, पंडित विवेकानंद दूबे, केशरी ओझा, संतोष दूबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। रिपोर्ट - जसवीर मोदनवाल 151167985
