इस वक्त की बड़ी खबर बिहार राज्य के गया जनपद से सामने आ रही है, जहां टेकारी प्रखंड के मऊ थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक रेव गढ़ एक बार फिर सुर्खियों में है। यह वही स्थान बताया जाता है जहां मुगल काल में राठौर राजपूत महिलाओं ने अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए जौहर किया था। इतिहास के पन्नों में दर्ज इस गांव की कहानी आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार उस समय गांव के राजपूत योद्धा युद्ध पर जाने से पहले अपनी पत्नियों को समय सीमा देकर जाते थे और कहते थे कि यदि वे वापस लौटकर ना आएं तो उनकी खोजबीन ना की जाए, बल्कि अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर लिया जाए। बताया जाता है कि इसी धरती पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने अग्नि में समर्पित होकर अपने सम्मान की रक्षा की थी।
ग्रामीणों का दावा है कि आज भी इस स्थान की खुदाई की जाए तो मानव कंकाल निकलते हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों से कंकालों के कारण यह जगह लगभग दस फीट ऊंची हो चुकी है। लेकिन इतने ऐतिहासिक महत्व के बावजूद आज तक इस धरोहर को सरकार द्वारा सुरक्षित नहीं किया गया है।
वहीं अब यही रेव गढ़ गांव एक और वजह से चर्चा में है। गांव में एक साथ तेईस घरों पर बुलडोजर कार्रवाई चल रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। फास्ट न्यूज इंडिया की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया।
इतिहास, आस्था और वर्तमान विवाद के बीच घिरा रेव गढ़ आज कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल को अब तक संरक्षण क्यों नहीं मिला? और बुलडोजर कार्रवाई के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है?
देखिए टेकारी थाना चैनल इंचार्ज अजय सिंह की यह खास रिपोर्ट।
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