यूपी हापुड़ गढ़ मुक्तेश्वर कुलपुर स्थित सरकारी गौशाला की जमीनी हकीकत तस्वीरों में साफ दिख रही है। शेड के अंदर का पूरा खरंजा उखड़कर बिखर चुका है। टूटी ईंटों और गड्ढों के बीच बेसहारा गोवंश बैठने को मजबूर हैं। बरसात से पहले मरम्मत नहीं हुई तो यहां बड़ा हादसा तय है। ध्यान फाउंडेशन, जो इस गौशाला का संचालन कर रही है, ने जिला प्रशासन की घोर लापरवाही पर कड़ा ऐतराज जताया है। फाउंडेशन के ट्रस्टी रोचक बंसल ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और खंड विकास अधिकारी को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि प्रशासन की उदासीनता सैकड़ों गोवंश की जान ले सकती है। गौशाला से आई इस तस्वीर में साफ दिख रहा है कि फर्श का ईंट-बिछाव पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। घटिया निर्माण के कारण खरंजा जगह-जगह से उखड़ गया है। इन नुकीली ईंटों और गहरे गड्ढों में फंसकर पशुओं के पैर टूटने का खतरा हर वक्त बना रहता है। बरसात में इन गड्ढों में पानी और कीचड़ भर जाएगा, जिससे फिसलकर चोटिल होने की घटनाएं और बढ़ेंगी।
पत्र में उठाए गए 5 बड़े मुद्दे
1. सड़क नहीं गौशाला तक पक्का रास्ता न होने से बरसात में चारा-भूसा पहुंचाना असंभव हो जाएगा।
2. टूटी बाड़ सभी शेडों की बाड़ टूट चुकी है, बीमार और स्वस्थ पशुओं को अलग रखना मुश्किल है।
3. उखड़ा फर्श जैसा तस्वीर में दिख रहा है, घटिया खरंजे से हर रोज पशुओं के घायल होने का खतरा है।
4. नीची दीवार: चारदीवारी की कम ऊंचाई से आवारा कुत्ते अंदर आ जाते हैं और सांड बाहर कूद जाते हैं।
5. भीड़भाड़: क्षमता से अधिक गोवंश होने के बाद भी प्रशासन ने कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया।
फाउंडेशन का कहना है कि अनुबंध के तहत इन सभी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त रखना सरकार की जिम्मेदारी है। पिछले निरीक्षणों और कई पत्रों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। ध्यान फाउंडेशन ने प्रशासन से तत्काल मांग की है कि मानसून से पहले सड़क निर्माण, फर्श की मरम्मत, बाड़ और दीवार को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाए, वरना भूख और दुर्घटनाओं से गोवंश की मौत की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी। जाबिर अली 151044786
