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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की हरि कथा में गूंजा प्रभु भक्ति का संदेश
  • 151158544 - JOGINDER PAUL SHARMA 0 4
    23 May 2026 16:15 PM



फास्ट न्यूज़ इंडिया जम्मू व कश्मीर जिला राजौरी की तहसील कालाकोट मथानी में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में मिथ्यानी निवासियों के सौजन्य से कालिका मिथ्यानी, तहसील त्रियाठ जिला राजौरी में भव्य पांच दिवसीय हरि कथा का कार्यक्रम जारी है। कथा कार्यक्रम के दूसरे दिन की सभा में दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी गौरी भारती ने बड़ी संख्या में उपस्थित जन समूह को प्रभु महिमा सुनते हुए कहा कि प्रभु की पावन कथा रूपी गंगा में जिस समय एक व्यक्ति आकर गोता लगाता है तो अपने कर्म संस्कारों की कालिमा से स्वयं को पवित्र बना लेता है। श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि संतों का समाज और प्रभु की पावन कथा चलता फिरता तीर्थराज प्रयाग है। प्रभु को प्राप्त करने के लिए मानव में श्रद्धा का होना अति आवश्यक है। श्रद्धा के अभाव में ही माता सती न भगवान शिव को समझ पाई और न प्रभु श्री राम को। नर लीला करते देखकर उनकी वास्तविकता से माता सती परिचित न हो पाई। आज यदि मानव में धर्म को लेकर के दायरे बन चुके हैं। उसकी बुद्धि में संशय भ्रम इत्यादि हैं तो कारण केवल मात्र एक है अज्ञान की दृष्टि। सर्वप्रथम आवश्यकता है एक सद्गुरु की शरणागत होकर उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करने की जिसके माध्यम से हम उस एक निराकार शक्ति, ज्योति स्वरूप उस परमात्मा का साक्षात्कार कर पाए। एक तत्व से ना जुड़े होने के कारण आज हमारे दृष्टि में भेद है। कोई भगवान श्रीराम को मानता है, तो कोई प्रभु श्री कृष्ण को, कोई शिव भगवान की पूजा करता है, तो कोई आदि शक्ति मां जगदंबिका की। लेकिन वास्तव में ज्ञान नेत्र के अभाव के कारण हम इन सब समस्त शक्तियों को अलग अलग मानकर उनकी पूजा करते हैं। यह तत्व स्वरूप से एक ही है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी आज वह दिव्य दृष्टि प्रदान कर उस एक शक्ति के साथ जोड़ रहे हैं। जिसके साथ जोड़कर मानव की भेद बुद्धि का नाश हो जाता है। निराकार साकार स्वरूप के पीछे छिपे तत्व स्वरूप को जानकर मानव की भक्ति सार्थक हो पाती है आज के कलिकाल में गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी वह दिव्य दृष्टि प्रदान कर मानव के घट में परमसत्ता का साक्षात्कार करवाने का सामर्थ्य रखते हैं। अपनी अंतर्गत में प्रभु श्री राम को जान करके ही हम राम राज्य की स्थापना में सहयोग कर सकते हैं। क्योंकि जब तक प्रभु श्री राम जी को ना जाना, उसे अपने ह्रदय आसन पर न बिठाया, तब तक हमारे भीतर रावण के जैसी प्रवृत्ति आतंक ही मचाती रहती है। उसे समाप्त करने के लिए अपने भीतर हमें राम को प्रकट करना होगा। कार्यक्रम के दौरान स्वामी सुचेतानंद, स्वामी हरिदासानंद, श्यामलाल शर्मा, कृष्ण लाल शर्मा, चमेल सिंह पूर्व सरपंच आदि विशेष तौर पर मौजूद रहे। अंत में सभी संगत में लंगर भंडारे का प्रसाद प्राप्त किया। अखनूर  जोगिंदर पाल शर्मा 15115844



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