ग़रीब, मजदूर, दलित वर्ग के लोगों ने दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोलियम पदार्थों की कम से कम खपत एवं सोने की कम से कम खरीद को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि खाड़ी युद्ध के चलते वैश्विक अस्थिरता के बीच राष्ट्र की चिंता प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय कर्तव्य एवं जिम्मेदारी है।
अंतरराष्ट्रीय अशांति एवं अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बन गया है। ऐसे में राष्ट्रीय मुद्रा कोष को मजबूत करना, स्वदेशी को अपनाकर देश में धन संचय हम सभी देशवासियों का परम कर्तव्य बन जाता है। खाड़ी युद्ध के कारण पूरे विश्व में जो हालात चल रहे है किसी से छिपे नहीं है, सबको पता हैं कि पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी वैश्विक संकट का परिणाम है। ईरान-अमेरिका तनाव और खाड़ी देशों में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है, सब को पता हैं कि पेट्रोल, डीजल,गैस और केमिकलों के दामों में बढ़ोतरी वैश्विक संकट का परिणाम है।
सब को पता हैं पूरी दुनियां इस संकट से जूझ रही हैं, लेक़िन हमारे देश में वैश्विक संकट के कठिन समय में भी देशविरोधी राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि सपा और कांग्रेस - भारत सरकार के खिलाफ जनता को गुमराह करने को अपनी जिम्मेदारी मान रही हैं। लेक़िन आज देश विरोधी राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि वैश्विक खाड़ी युद्ध संकट में भी कांग्रेस और सपा राष्ट्रहित से पार्टीहित को ऊपर मानने लगी हैं। नतीजतन सरकार के इस सकारात्मक अपील को समर्थन के बजाय वह इसे सरकार की असफलता बताने में लगी है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 1967 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने भी युद्ध के कारण देशवासियों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी, ताकि भारत की अर्थव्यवस्था को संतुलित एवं सुदृढ़ बनाया जा सके। सम्पूर्ण विपक्ष ने उस समय प्रधानमंत्री स्वर्गीय गांधी की अपील का पुरजोर समर्थन किया था तथा इसे राष्ट्रहित में जरूरी बताया था। परंतु आज़ संकट के समय में भी विपक्ष के गैर जिम्मेदाराना रवैया के कारण देश में राजनीतिक अराजकता की स्थिति बन गई है। विपक्ष सरकार के खिलाफ जनता को गुमराह करने को अपनी जिम्मेदारी मान रही हैं।
आखिर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा को देश से कोई लेना देना नहीं हैं, इन्हें तो संकट में भी अपनी मनमानी देशविरोधी राजनीति ही करनी हैं, खैर, जनता को इनसे देश के भले की कोई उम्मीद भी नहीं हैं। ना इन्होने कभी देश के भले कि कोई बात की हैं और ना कभी करेंगे। इनकी इन्हीं देश विरोधी हरकतों और फ़ितरतों के कारण ग़रीब, मजदूर, दलित वर्ग का वोटर इन्हें पसंद नहीं करता उसे पता हैं कि यह दुबारा सत्ता में आएं तो फुल मनमानी से गुंडागर्दी करेंगे। उनकी जमीनों पर ज़बरन कब्ज़ा करेंगे फ़िर उन्हें घात लगा कर मरेंगे और झूठ बोलकर पुलिस से फ़र्ज़ी मुक़दमे कराएंगे और निर्दोष गरीबों को न्यायालय के चक्कर कटबाएंगे। इसीलिए ग़रीब, मजदूर, दलित वर्ग का वोटर इनको वोट नहीं करता हैं। नतीजतन इनकी राजनीति ग़रीब, मजदूर, दलित वर्ग के वोटर को किसी भी तरह अफवाहें फैलाके, गुमराह करने, भड़काने, अराजकता का माहौल बनाने और कैसे भी सत्ता दुबारा कब्जाने तक सीमित हो गयी हैं। इन्हें देश से कोई मतलब नहीं इन्हें तों बस दुबारा सत्ता पर अपना कब्जा चाहिए। इनका सिर्फ़ अब यही मकसद हैं।
रिपोर्ट नंदकिशोर शर्मा 151170853
