पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान-अमेरिका तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराते संकट को लेकर वरिष्ठ नेता उपेंद्र सिंह ने संयम, सतर्कता, समझदारी और राष्ट्रहित में सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता की परीक्षा का समय है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व की सरकारों की तरह किसी प्रकार के दान की अपील नहीं कर रहे, बल्कि देशहित में ईंधन की बचत, आयात में कमी और सामूहिक सहयोग की बात कर रहे हैं। उनका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना और भारत को भविष्य के बड़े ऊर्जा संकट से बचाना है।
“कोरोना महामारी वैश्विक संकट थी, ईरान युद्ध इस दशक का सबसे बड़ा संकट”
उपेंद्र सिंह ने कहा कि जिस प्रकार कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था, उसी तरह ईरान-अमेरिका संघर्ष और खाड़ी देशों में जारी युद्ध इस दशक का सबसे बड़ा वैश्विक संकट बनकर उभरा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1990-92 के आर्थिक संकट में भारत को 67 टन सोना गिरवी रखना पड़ा था। आज परिस्थितियां अलग जरूर हैं, लेकिन चुनौतियां उतनी ही गंभीर हैं।
उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और केमिकल उत्पादों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि अन्य देशों की तुलना में भारत में स्थिति अभी भी काफी बेहतर बनी हुई है।
ऊर्जा संकट और महंगाई का असर पूरी दुनिया पर
वरिष्ठ नेता ने कहा कि खाड़ी युद्ध के कारण दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कई विकसित देशों में ईंधन संकट गहराने लगा है और खाद्य सामग्री से लेकर रसायनों तक की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, परिवहन व्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन पर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत को हर दिन महंगे कच्चे तेल, गैस और केमिकल आदि के कारण हजारों करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। खाद्य तेल, उर्वरक और सोने के आयात पर विदेशी मुद्रा का भारी दबाव बढ़ा है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों से अनावश्यक खर्चों में कटौती और ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील कर रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बचाना आज सबसे बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी
उपेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार युद्ध शुरू होने के समय लगभग 720 अरब डॉलर था, जो अब घटकर करीब 690 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में आयात पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल और गैस का उपयोग बंद करने की बात नहीं कर रही, बल्कि जरूरत और समझदारी के अनुसार उपयोग करने की सलाह दे रही है। सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग, घरेलू पर्यटन को बढ़ावा और ईंधन की बचत जैसे कदम देश को मजबूत बना सकते हैं।
“वैश्विक संकट में एकजुट होने की जरूरत”
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश ने कोरोना महामारी के दौरान एकजुट होकर कठिन परिस्थितियों का सामना किया था, उसी तरह आज भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी होगी। यह समय अफवाहों या राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में सामूहिक सहयोग का है।
उपेंद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में संयम, स्वदेशी, ईंधन बचत और आत्मनिर्भरता ही भारत को मजबूत बनाएंगे। उन्होंने अपील की कि सरकार की अपीलों को गंभीरता से समझें और राष्ट्रहित में अपनी जिम्मेदारी निभाएं, ताकि भविष्य में देश किसी बड़े ऊर्जा संकट से सुरक्षित रह सके।
रिपोर्ट नंदकिशोर शर्मा 151170853
