- हाई कोर्ट के स्टे के बावजूद मकान तोड़ने का आरोप, पीड़ित ने लेखपाल-प्रधान प्रतिनिधि पर उठाए सवाल
- बलिया में पुश्तैनी मकान पर चला रास्ता बनाने का दबाव, भाजपा कार्यकर्ता ने लगाई न्याय की गुहार
- ‘1994 से कोर्ट का स्थगन आदेश’, फिर भी कार्रवाई का दबाव; पीड़ित परिवार में दहशत
- सिकन्दरपुर के डूहा बिहरा गांव में जमीन विवाद गरमाया, लेखपाल और प्रधान प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप
- ‘जब मैं ही सुरक्षित नहीं तो आम जनता का क्या होगा’— भाजपा बूथ अध्यक्ष का प्रशासन पर हमला
- सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का भी आरोप, पीड़ित ने शासन-प्रशासन से मांगी निष्पक्ष कार्रवाई
खबर उत्तर प्रदेश के बलिया से है। जहां हाई कोर्ट के स्टे के बाद भी पक्का मकान को तोड़कर रास्ता बनाने का दबाव लेखपाल व वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पर पीड़ित ने लगाया गंभीर आरोप।पूरा मामला सिकन्दरपुर थाना क्षेत्र के डूहा बिहरा गांव की है।पीड़ित मुन्ना वर्मा ने क्षेत्रीय लेखपाल व प्रधान प्रतिनिधि पर आरोप लगाया हैं। की हमारी पुस्तैनी मकान को तोड़कर जबरदस्ती सार्वजनिक रास्ता बनवाना चाहते हैं। जब उसी मकान में हमारा पूरा परिवार रहता है। राजनीतिक द्वेषता के कारण हमको परेशान किया जा रहा हैं। जब की उस जमीन पर 1994 से अबतक हाई कोर्ट का स्थगन आदेश है। फिर भी लेखपाल कानूनगो और प्रधान मिलकर हमें प्रताड़ित कर रहे हैं। मुन्ना वर्मा ने यहां तक बताया कि मैं भारतीय जनता पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता हूं और अपने गांव में बूथ अध्यक्ष हूं। उन्होंने अपने ही पार्टी पर सवाल खड़ा कर दिया कहा कि जब मैं सुरक्षित नहीं मेरा उत्पीड़न किया जा रहा। तो दूसरे को क्या कहूं। श्री वर्मा क्षेत्रीय लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे ही गांव में लेखपाल की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कराया जा रहा हैं। उन्होंने शासन प्रशासन से मांग किया है की जब तक न्यायालय का कोई आदेश नहीं आ जाता स्थगन आदेश का पालन कराया जाए। नहीं तो हमारी पूरी संपत्ति को ले ले हम लोग गांव छोड़कर चले जाएं। आगे उन्होंने क्या कुछ कहा देखिए बलिया से अंगद की रिपोर्ट में
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