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मातृ दिवस पर भव्य आयोजन सम्पन्न, मां को बताया गया साक्षात पृथ्वी स्वरूप एवं जीवन का आधार
  • 151019049 - VISHAL RAWAT 65 76
    11 May 2026 18:24 PM



फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। रामानुज आश्रम सर्वोदय सद्भावना संस्थान के तत्वावधान में मातृ दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन श्रीमती निर्मला पांडे नारायणी रामानुजदासी, प्रधानाचार्य राजा दिनेश सिंह कन्या इंटरमीडिएट कॉलेज बढ़नी की अध्यक्षता में उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के विधिवत पूजन, दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।कार्यक्रम में धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने मातृ शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में मां का स्थान सर्वोच्च एवं पूजनीय है। मां केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की पालनकर्ता, संरक्षिका एवं संस्कारों की प्रथम शिक्षिका है। उन्होंने कहा कि माता के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है, क्योंकि वह न केवल शरीर को जन्म देती हैं बल्कि जीवन को दिशा भी प्रदान करती हैं। उन्होंने माता लक्ष्मी, मां सरस्वती एवं मां पार्वती का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तीनों शक्तियां क्रमशः धन, ज्ञान एवं शक्ति का प्रतीक हैं और संपूर्ण जगत का कल्याण करती हैं। धर्माचार्य ने कहा कि नारी शक्ति के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती, और भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव देवी स्वरूप माना गया है। मदर्स डे के ऐतिहासिक संदर्भ पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 10 मई 1908 को अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया राज्य के ग्राफ्टन शहर में जार्विस की दिवंगत माता की स्मृति में प्रथम बार चर्च में यह आयोजन किया गया था। इसके पश्चात 1914 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन द्वारा इसे राष्ट्रीय अवकाश का दर्जा प्रदान किया गया, जिसके बाद यह दिवस वैश्विक स्तर पर मातृत्व के सम्मान के रूप में मनाया जाने लगा।धर्माचार्य ने शास्त्रीय उद्धरण प्रस्तुत करते हुए कहा—“आचार्यो ब्रह्मणो मूर्तिः पिता मूर्तिः प्रजापतेः।माता पृथिव्या मूर्तिस्तु भ्राता स्वो मूर्तिरात्मनः॥” (मनुस्मृति 2/226)उन्होंने कहा कि शास्त्रों में मां को पृथ्वी का साक्षात स्वरूप बताया गया है, जो धैर्य, त्याग, सहनशीलता और करुणा की प्रतिमूर्ति है। मां के ऋण से मनुष्य जीवन भर भी मुक्त नहीं हो सकता। कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा अवधी भाषा में प्रस्तुत सोहर, भजन एवं पारंपरिक गीतों ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। मातृ सम्मान के इस अवसर पर उपस्थित सभी ने भावपूर्ण सहभागिता दर्ज कराई। इस अवसर पर चंद्रावती शुक्ला, सुमन शर्मा, आशा ओझा, आरती शर्मा, सुधा, वीना, विमला शुक्ला, प्रतिमा, शांति शुक्ला, सुनीता, प्रज्ञा, सावित्री, ललिता पांडे, सीता मिश्रा, नीलम निधि सिंह, पूर्व प्रधान रोली सिंह, दिव्यांशी शुक्ला, उर्मिला, मुन्नी कुमारी गुप्ता, रेखा मिश्रा, संगीता शुक्ला, सुंदरी मिश्रा सहित अनेक महिलाओं को उनके योगदान एवं सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन प्राची पांडे (प्रधानाध्यापक) द्वारा किया गया। समापन पर सभी ने मातृ शक्ति के सम्मान एवं संरक्षण का संकल्प लिया। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049



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