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महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें युवा : डॉ. महेंद्र सिंह, MLC एवं पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश
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    10 May 2026 20:39 PM



महाराणा प्रताप की तरह मातृभूमि के प्रति होना चाहिए समर्पित : प्रो. (डॉ.) वंगछुग दोर्जे नेगी, कुलपति, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान

महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान एवं पं. दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

वाराणसी। महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान एवं पं. दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में शनिवार को 'विकसित भारत की संकल्पना में महाराणा प्रताप का राष्ट्र प्रेम एवं राष्ट्रीयता' विषयक पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गांधी अध्ययन पीठ सभागार में आयोजित संगोष्ठी की शुरुआत महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के द्वारा महाराणा प्रताप के जीवन पर निर्मित डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तुति के साथ हुई। इस मौके पर मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का केवल जन्म नहीं हुआ था, बल्कि उनका अवतरण हुआ था, क्योंकि ऐसे वीर जन्म नहीं लेते, वे अवतरित होते हैं। उन्होंने महाराणा प्रताप के स्वाभिमान और अदम्य साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि जिसके हाथी को अकबर नहीं झुका पाए, उसके स्वाभिमान को कोई कैसे झुका सकता हैं। उन्होंने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वीरता का वर्णन करते हुए कहा कि वह ऐसा स्वामिभक्त घोड़ा था, जिसने घायल महाराणा प्रताप को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के बाद ही अपने प्राण को त्यागा। महाराणा प्रताप के साम्राज्य में अरावली का उल्लेख करते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि महाराणा प्रताप इतने विशाल साम्राज्य के राजा होकर भी अपने संकल्प और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सब कुछ त्यागने को तैयार रहे तथा अपने संकल्प को पूरा करके ही आगे बढ़े। युवाओं को आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि हमें महाराणा प्रताप के विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए, जिससे भारत विकसित राष्ट्र बन सके।

अध्यक्षता करते हुए अध्यक्षता केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति प्रो. (डॉ.) वंगछुग दोर्जे नेगी ने कहा कि जिस प्रकार महाराणा प्रताप ने संकल्प लिया था कि वे मुगलों की जंजीरों में कभी बंधेगे नहीं, इसके लिए उन्होंने अपना सर्वस्व त्याग दिया, उसी प्रकार हमें भी अपने राष्ट्र और मातृभूमि के प्रति समर्पित होना चाहिए। प्रो. नेगी ने कहा कि जैसे महाराणा प्रताप अपनी मातृभूमि के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित थे, वैसे ही यदि हम भी अपने देश के प्रति समर्पण की भावना रखें, तभी हमारा जीवन सार्थक और अमर होगा। शोषण और दुराचार के विरुद्ध जिस प्रकार महाराणा प्रताप ने आवाज उठाई, उसी प्रकार यदि हम उनके संघर्षों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारें, तो विकसित भारत की संकल्पना अवश्य पूर्ण होगी।

विशिष्ट अतिथि सैय्यदराज विधायक सुशील सिंह ने कहा कि शौर्य, वीरता, पराक्रम और त्याग के प्रतीक वीर महाराणा प्रताप को हम नमन करते हैं। ऐसे महापुरुष, जिनका नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, उन्होंने कभी भी मुगलों के सामने मस्तक नहीं झुकाया। उन्होंने कहा कि जयंती मनाने का अर्थ केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन में उतारना है। महाराणा प्रताप ने अनेक बार अकबर का सामना किया और मुगल भी उनसे भयभीत रहते थे। उसी प्रकार हमें भी बिना डरे अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप हम सभी प्रेरणास्रोत हैं। आज अकबर तो इतिहास बन चुका है, लेकिन भविष्य में कोई दूसरा अकबर न बने, इसके लिए हमें महाराणा प्रताप को अपने हृदय में बसाना होगा। उन्होंने कहा कि जैसे महाराणा प्रताप ने कभी अपना सिर नहीं झुकने दिया, उसी प्रकार देश के युवा भी भारत माता का मस्तक झुकने नहीं देंगे।

सारस्वत अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री अभिलाष ने कहा कि महाराणा प्रताप ने संघर्ष के दौर देखे उन्होंने घास की रोटी खाई, लेकिन कभी डरकर पीछे हटना नहीं सीखा। उन्होंने कहा कि आज के समय में विद्यार्थी अपने लक्ष्यों को लेकर अक्सर घबरा जाते हैं, ऐसे में हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और बिना डरे निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। संचालन महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम सचिव प्रो. कृष्ण कुमार सिंह के किया। इस अवसर पर प्रो. अमिता सिंह, प्रो. संतोष कुमार, डॉ. अमरीश राय, डॉ. वैष्णवी शुक्ला, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, गुरु प्रकाश सिंह, करन सिंह, देवेन्द्र गिरि, रवि, पुलकित, नितिन, समर आदि उपस्थित रहे।



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