मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र की प्रमुख नदियों में शामिल भैंसही नदी करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी सूखी दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर नदी की तलहटी में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे नदी पुनर्जीवन योजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी बजट खर्च होने के बाद भी नदी में पानी नहीं टिक सका और किनारों पर लगाए गए पौधे भी सूखने लगे हैं।
भैंसही नदी के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत 1 मार्च 2025 को रसूलपुर गांव से की गई थी। करीब 53.15 किलोमीटर लंबी नदी की सफाई, खुदाई और पौधरोपण का कार्य कराया गया था। अधिकारियों ने दावा किया था कि नदी में सालभर पानी रहेगा और किसानों को सिंचाई के साथ जल संरक्षण का लाभ मिलेगा। इस परियोजना पर लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के भतड़ी-चकभतड़ी गांव समेत कई इलाकों में नदी की खुदाई कराई गई थी। उस समय तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत नागर ने मौके पर पहुंचकर कार्यों का निरीक्षण भी किया था। बावजूद इसके वर्तमान स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती दौर में तेजी से काम हुआ, लेकिन बाद में रखरखाव और निगरानी के अभाव में योजना दम तोड़ती नजर आने लगी।
समाजसेवी अखंड प्रताप सिंह शमशाबाद ने बताया कि कभी इसी नदी के पानी से खेती और पशुओं की जरूरतें पूरी होती थीं, लेकिन अब नदी सूखकर दरारों में बदल गई है। वहीं लग्गूपुर निवासी महेंद्र यादव ने कहा कि भैंसही नदी क्षेत्र की पहचान रही है और इसे स्थायी रूप से जलयुक्त बनाए जाने की जरूरत है, ताकि किसानों और ग्रामीणों को वास्तविक लाभ मिल सके।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। इस संबंध में एसडीएम मुहम्मदाबाद गोहना अर्चना अग्निहोत्री ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से बात कर अधूरे कार्य जल्द पूरे कराए जाएंगे तथा शासन की मंशा के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। रिपोट - अजय कुमार 151170379
