एम्स गोरखपुर के सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान दो वर्ष पहले हुई थी छात्रों के बीच मारपीट, हाईकोर्ट ने छात्र जितेंद्र भाटी की याचिका कर दी थी खारिज
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर में दो वर्ष पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम में मारपीट का आरोप लगाने वाला छात्र जितेंद्र भाटी एमबीबीएस की परीक्षा में फेल हो गया है। इसके बाद छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स की कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता से जवाब मांगा है। इससे पहले मारपीट के मामले में 12 छात्रों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को पहले ही खारिज किया जा चुका है। 12 छात्रों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के लिए जितेंद्र भाटी की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने सुनवाई की।
एम्स प्रतिनिधि के अनुसार जितेंद्र भाटी ने याचिका यह लिखा मैं एम्स गोरखपुर में एमबीबीएस का छात्र हूं। 27 नवंबर, 2024 को एम्स के वार्षिक उत्सव के दौरान, जब गायक अजय हुड्डा मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे, अपीलकर्ता कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर गया। अपीलकर्ता को देखते ही विपक्षी पार्टी संख्या दो, अभिषेक रंजन और राहुल रंजन, अपने कुछ दोस्तों के साथ, जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करते हुए मुझे गाली देने लगे और पीटने की धमकी देते हुए मेरी ओर दौड़ने लगे। मैं भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उन्होंने मुझे पकड़ लिया और लातों, जूतों और चप्पलों से पीटना शुरू कर दिया तथा जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करते हुए मुझे जान से मारने की धमकी दी। कुछ दोस्तों और कॉलेज प्रशासन के सदस्यों के हस्तक्षेप से मेरी जान बची। तीन दिन बाद, यानी 30 नवंबर, 2024 को सुबह लगभग 11:04 बजे, जब मैं एम्स कैंपस के बाहर दोपहर का भोजन कर रहा था, तब सहपाठी कार्तिक कुमार पांडेय, जो अभिषेक रंजन और राहुल रंजन का मित्र था, ने अपीलकर्ता को बुलाया और गाली दी। कार्तिक कुमार पांडेय ने कहा कि चूंकि वह उस दिन यानी 27 नवंबर, 2024 को उपस्थित नहीं था, इसलिए उसने मुझे उकसाते हुए कहा कि यदि वह अपने पिता का असली बेटा है, तो वह उसके कमरे में आकर अपना साहस दिखाएगा। उसने यह भी कहा कि वे मुझे मार डालेंगे। मैंने तुरंत मोबाइल पर संदेश भेजकर डीन डॉ. शिखा सेठ और हॉस्टल प्रोवोस्ट डॉ. सूर्यकांत सेठ को इस घटना की सूचना दी। डॉ. शिखा सेठ ने मुझसे कहा कि मैं हॉस्टल प्रोवोस्ट से बात करूं और उनसे मिलने पर सब ठीक हो जाएगा। आधे घंटे बाद जब मैं एम्स के गेट पर आया और फोन पर डॉ. शिखा सेठ से बात कर सुरक्षा मांगी, तो उन्होंने मुझे गार्ड से बात करने को कहा और आश्वासन दिया कि सुरक्षा मिल जाएगी। जब मैं पीजी बॉय हॉस्टल पहुंचा और गार्ड को बात करने के लिए बुलाया, तो मेरे बैचमेट कार्तिक पांडेय, अखिलेंद्र, राहुल रंजन, आशुतोष यादव, शुभम झा, सोनू सिंह राजपूत, युवराज, बरुण सौरभ, श्रेयस शर्मा, आदर्श, पृथ्वीराज, हर्ष प्रताप, ज्ञान प्रकाश, अभिषेक आनंद, अंकित दुबे और प्रत्युष प्रीतम सहित वहां पहुंचे और मुझे कॉलर पकड़कर घसीट लिया। उन्होंने मुझे लात-घूंसे मारकर, घसीटकर और थप्पड़ मारकर बेरहमी से पीटा और जातिगत अपशब्दों का प्रयोग करते हुए गालियां भी दीं। मारपीट के दौरान, राहुल रंजन ने अपीलकर्ता के गले से सोने की चेन छीन ली। इसी बीच, मेरे दोस्तों और वहां तैनात गार्डों ने मुझे बचा लिया। इस घटना के दौरान, मेरी नेक्सन कार (नंबर 24BH6954H) को ईंटों, पत्थरों और लाठियों से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। कार में बैठे यात्री को भी गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद, मैं एम्स पुलिस स्टेशन गया और घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मुझे अगले दिन थाने आने को कहा, लेकिन पुलिस अगले दिन एम्स परिसर गई, जहां मैं मौजूद नहीं था। थाने ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मैं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से और पंजीकृत डाक के माध्यम से सूचित किया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। न्यायमूर्ति ने आदेश में लिखा है कि अदालत में दिए गए सभी तर्कों पर विचार करने और कानूनी मामलों का अध्ययन करने के बाद, मेरा यह मत है कि विवादित आदेश में कोई अवैधता या खामी नहीं है और न ही अदालत की प्रक्रिया का कोई दुरुपयोग हुआ है। अतः, इस मामले में न्यायालय द्वारा किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
एम्स गोरखपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप मोहंती ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए संस्थान इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा।
रिपोर्ट - फूलमती मौर्य 151188511
