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मां के अटूट प्रेम और ममता की गहराई को दर्शाती है
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  • 151168597 - RAJESH SHIVHARE 65 76
    02 May 2026 14:40 PM



मध्य प्रदेश के जबलपुर में Bargi Dam में हुए क्रूज हादसे के दौरान एक बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जिसने सभी को झकझोर दिया।

बचाव दल के मुताबिक मलबे से एक महिला का शव निकालते समय उन्हें काफी कठिनाई हुई, क्योंकि वह अपने बच्चे को सीने से कसकर लगाए हुए थी। बताया गया कि मां ने अपने करीब 4 साल के बेटे को इस तरह जकड़ रखा था कि दोनों को अलग करना मुश्किल हो रहा था।

इस दर्दनाक दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोग ही नहीं, बल्कि कैबिनेट मंत्री Rakesh Singh भी भावुक हो गए। हर किसी की आंखें नम हो गईं।

यह घटना एक बार फिर मां के अटूट प्रेम और ममता की गहराई को दर्शाती है, जहां अंतिम क्षण तक उसने अपने बच्चे का साथ नहीं छोड़ा।

जबलपुर त्रासदी: टूटे शीशे ने बचा ली जान, बच्ची ने बयां किया मौत के साये का वो खौफनाक मंजर

Jabalpur Tragedy: आपराधिक लापरवाही: लहरें लील गईं हंसती-खेलती जिंदगी, अस्पताल में बिखरा दर्द, परिजनों के मिले पार्थिव शरीर

 

Jabalpur Tragedy: बरगी जलाशय की खौफनाक लहरों में एक ऐसी दास्तान भी दफन हो गई, जिसे सुन 'पत्थर' भी पिघल जाएं। 36 वर्षीय मां मरीन मैसी ने अपने चार वर्षीय बेटे त्रिशान और खुद को बचाने अंत तक संषर्ष किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया होगा कि उसका लाल डरे नहीं। मां ने अपने बेटे को लाइफ जैकेट में अंदर करके उसे टाइट कर लिया। दुर्भाग्य से मां—बेटे बच नहीं सके। शुक्रवार को जब उन्हें बाहर निकाला गया तब भी मां मरीन ने अपने बेटे त्रिशान को सीने से चिपकाए मिलीं। यह दर्दनाक नजारा हर किसी को रुला गया। हादसे में सुरक्षित निकली मरीन की बेटी सिया, क्रूज के अंदर पसरे मौत के साये के खौफनाक मंजर को याद करते हुए सिसक उठी। इस बच्ची ने बताया कि कैसे टूटे शीशे के कारण उसकी जान बच गई।

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सिया का परिवार दिल्ली से जबलपुर आया था। उसने बताया कि गुरुवार को हम सबने सोचा कि कहीं बाहर घूमने जाते हैं। चार दिन की छुट्टी पर नाना-नानी, पापा-मम्मी, भाई और मैं घूमने गए थे। एक दिन पहले बड़े पापा के घर का उद्घाटन था। उसमें शामिल होने के बाद डैम घूमने गए थे। सभी लोग खुश थे लेकिन हादसे ने मानो सब कुछ छीन लिया।

 

न लाइफ जैकेट दी, न कोई नियम बताया

अपनी मां मरीन और भाई त्रिशान को खो चुकी बच्ची सिया ने रोंगटे खड़े करने वाला मंजर बयां किया। उसकी बातों से सुरक्षा दावों की पोल भी खुली है। बकौल सिया- पापा (प्रदीप) ने सभी को लाइफ जैकेट दीं। मैने भी जैकेट पहनी। जैकेट बड़ी थी तो मम्मी ने उसे टाइट किया। मम्मी ने भी जैकेट पहनी। भाई को लाइफ जैकेट पहनाने वाली ही थीं कि तभी तेज लहर आने लगी।

 

सिया ने सिसकते हुए बताया कि मम्मी ने भाई को लाइफ जैकेट में अंदर करके टाइट कर लिया। इसी बीच क्रूज का शीशा टूट गया। इससे मैं और पापा बाहर निकल गए। जब तक मम्मी और भाई निकल पाते क्रूज पूरा पलट गया। उन्हें निकलने की जगह ही नहीं मिल पाई।

 

सवाल करने पर पर सिया ने बताया कि लाइफ जैकेट पहले से नहीं दी गई थीं। किसी को कुछ नियम भी नहीं बताया। मेरे पापा और दो लोगों ने लाइफ जैकेट निकालीं।

 

मरीन और त्रिशान के शवों को जब मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मर्चुरी लाया गया, तो परिजनों का दर्द छलक पड़ा। बेटे का चेहरा देख पिता प्रदीप खुद को संभाल नहीं पाए। फफककर रो पड़े। बेटे को गोद में उठाकर पुकारा। पत्नी का हाथ थामकर अपनी पीड़ा जताई। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर गया।

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