- पोनी क्षेत्र में कार्यक्रम का आयोजन और जन समस्याओं की सुनवाई
- मजदूर दिवस का ऐतिहासिक महत्व (1 मई 1886)
- शहीद मजदूरों को श्रद्धांजलि और संघर्ष की विरासत
- विश्व स्तर पर मजदूर दिवस का आयोजन और जागरूकता
- रियासी जिले के पोनी क्षेत्र में कार्यक्रम का आयोजन
- स्टेट ब्रेकिंग प्रेसिडेंट का दौरा और जन सुनवाई
- स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की समस्याएं
- मजदूर दिवस का इतिहास: 1 मई 1886 का संघर्ष
- शहीद मजदूरों को श्रद्धांजलि और उनका योगदान
- विश्व भर में मजदूर दिवस का महत्व और आयोजन
जम्मू-कश्मीर के जिला रियासी की तहसील पोनी के अंतर्गत भामला और चौकी चौरा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के स्टेट ब्रेकिंग प्रेसिडेंट स्वयं मौके पर पहुंचे और उन्होंने आम कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय लोगों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना।
कार्यक्रम के दौरान 1 मई के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि 1 मई 1886 से पहले मजदूरों से 24 घंटों में से लगभग 18 घंटे तक काम करवाया जाता था। इस अन्याय के खिलाफ 1 मई 1886 को मजदूरों ने आवाज उठाई, जिसमें कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
इन्हीं शहीद मजदूरों की याद में हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस (लेबर डे) के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन पूरे विश्व में श्रमिक वर्ग के लोग उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और अपने अधिकारों तथा सम्मान के लिए जागरूकता फैलाते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने मजदूरों के संघर्ष को याद करते हुए उन्हें सम्मान दिया और उनके योगदान को सराहा। देखे विनोद कुमार की रिपोट
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