अम्बेडकरनगर नगर क्षेत्र जहांगीरगंज में सरकारी धन के खुले दुरुपयोग और कथित भ्रष्टाचार का ऐसा मामला सामने आया है, जिसे देखकर लोग पूछ रहे हैं—यह तालाब बन रहा है या बजट का तर्पण हो रहा है? नगर क्षेत्र के वार्ड संख्या 2 फत्तेहपुर स्थित अंबेडकर पार्क के ठीक बगल अमृत सरोवर योजना के तहत कराए जा रहे तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुसार सीमेंट कंक्रीट और अच्छी गुणवत्ता की ईंटों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि तालाब अमृत सरोवर बनने से पहले ही भ्रष्टाचार के दीमक का शिकार हो गया है।गुस्साए मोहल्ले के लोगों ने विरोध जताते हुए पीली ईंटों को हल्के हाथों से आपस में टकराया और ईंटें चकनाचूर हो गईं। यह नज़ारा देखकर लोगों ने तंज कसा—“जब ईंट इतनी कमजोर है तो निर्माण कितना मजबूत होगा, भगवान मालिक! ग्रामीणों का आरोप है कि मानक स्तर की ईंट, सीमेंट और बालू का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जा रहा। जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से लगभग एक करोड़ चालीस लाख रुपये की परियोजना सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों ने यह भी बताया कि तालाब का सौंदर्यीकरण कार्य करीब डेढ़ वर्ष से चल रहा है, लेकिन आज तक तालाब अपने पूरे स्वरूप में नहीं आ पाया। अभी भी कई काम अधूरे पड़े हैं। सीढ़ियां अधूरी, वृक्षारोपण अधूरा, घाट निर्माण अधूरा, वाक-वे अधूरा—यानी विकास पूरा गायब और भुगतान तैयार! ग्रामीणों का आरोप है कि अधूरे कार्य के बावजूद फाइलों में काम पूरा दिखाकर भुगतान निकालने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर साइन बोर्ड तक नहीं लगाया गया, जिससे जनता को पता ही न चले कि कितना पैसा आया और कहाँ गया। उधर नगर पंचायत जहांगीरगंज के कई निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की खबरें सामने आने के बाद ईओ उमेश कुमार पासी जांच करने पहुंचे, लेकिन जनता का कहना है कि उन्हें कोई कमी नजर नहीं आई। यह सुनकर नगर पंचायत वासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“जेई इंजीनियर, ईओ और चेयरमैन अगर पहले से कमीशन सेटिंग में व्यस्त हैं, तो जांच में कमी कैसे दिखेगी? यहां तो योजना बनने से पहले ही प्रतिशत तय हो जाता है! अब जनता की मांग है, कि जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि करोड़ों की योजना में पारदर्शिता आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो। जनता की निगाहें अब नवागत जिलाधिकारी ईशा प्रिया पर टिकी हैं। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आखिर कब होगी जांच, कब खुलेगा राज, और कब भ्रष्टाचार के तालाब में जवाबदेही का पत्थर फेंका जाएगा। फिलहाल जहांगीरगंज में एक ही सवाल गूंज रहा है—तालाब बनेगा या सिर्फ हिसाब बनेगा?
रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853

