भाकियू (भानू) का 'हल्ला बोल': बदसलूकी के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा, झुकने को मजबूर हुआ टोल प्रबंधन
पीलीभीत। सत्ता के रसूख और बदतमीजी के आरोपों में घिरे टोल कर्मियों को उस वक्त अपनी गलती का एहसास हुआ, जब उनका सामना संगठित किसान शक्ति से हुआ। पूरनपुर-खुटार स्थित हिटोटा टोल प्लाजा पर भारतीय किसान यूनियन (भानू) के एक पदाधिकारी के साथ अभद्रता करना टोल प्रबंधन के लिए जी का जंजाल बन गया। मामला तब शुरू हुआ जब भाकियू (भानू) के तहसील मीडिया प्रभारी सबलू खान शाहजहांपुर से वापस लौट रहे थे। आरोप है कि टोल मैनेजर और वहां मौजूद कर्मियों ने न केवल उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उनके पद और गरिमा का भी अपमान किया। एक पत्रकार और किसान नेता के साथ हुई इस बदसलूकी की खबर मिलते ही संगठन में आक्रोश फैल गया।
अपमान का बदला लेने के लिए भाकियू (भानू) के दिग्गज नेता—शाहजहांपुर जिलाध्यक्ष महेंद्र, पीलीभीत जिलाध्यक्ष भजनलाल 'क्रोधी', मंडल अध्यक्ष लालू मिश्रा और जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र गुप्ता—सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ टोल पर जा धमके। किसानों ने पहुंचते ही टोल के बैरियर हटा दिए। परिणामस्वरूप कई घंटों तक टोल पूरी तरह 'फ्री' रहा और वाहन बिना टैक्स दिए सरपट दौड़ते रहे।
भारी पुलिस बल और थाना अध्यक्ष की मौजूदगी के बावजूद किसान कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। यूनियन पदाधिकारियों का साफ कहना था, "जब तक अहंकार में डूबे टोल कर्मी अपनी गलती नहीं मानते और माफी नहीं मांगते, तब तक एक भी रुपया टैक्स नहीं कटने दिया जाएगा।" किसानों के उग्र तेवर और लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान को देखते हुए टोल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। अंततः, भारी पुलिस बल और यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच, टोल मैनेजर ने सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगी और भविष्य में इस तरह की घटना न दोहराने का आश्वासन दिया। मैनेजर के लिखित और मौखिक खेद जताने के बाद ही किसानों ने अपना धरना समाप्त किया और टोल का संचालन फिर से शुरू हो सका। इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जनता के साथ दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट जियाउल हक़ खान पीलीभीत -151173981
