EPaper Join LogIn
एक बार क्लिक कर पोर्टल को Subscribe करें खबर पढ़े या अपलोड करें हर खबर पर इनकम पाये।

भीषण गर्मी में फिर से राहत देने के लिए तैयार गणपत फार्म हाउस
  • 151170853 - NAND KISHOR SHARMA 54 65
    26 Apr 2026 19:38 PM



जहांगीराबाद। मनुष्य की आवश्यकताएं हमेशा बढ़ती रही हैं। जिसके कारण उसने नैतिक और अनैतिक सभी तरीकों को अपनाकर सबसे ज्यादा पर्यावरण को प्रभावित किया है। वर्तमान समय में भीड़भाड़ और शोरगुल के कारण मनुष्य का जीवन काफी प्रभावित भी हुआ है। जरूरतों को पूरा करने के बाद भी इंसान को हमेशा एक चीज़ की तलाश रही है और वो है सुकून। 

   जहांगीराबाद के निकटवर्ती गांव तहगौरा में एक ऐसा ही स्थान सुशील कंसल ने बनाया है जहां इंसान खुद को प्रकृति की गोद में महसूस करता है। इस स्थान का नाम है "गणपत फार्म हाउस"। हालांकि ये स्थान यहां के वाशिंदों के लिए नया नहीं है लेकिन कोलाहल भरे जीवन के आदि हो चुके मेट्रो सिटी में रहने वाले लोगों के लिए यह किसी वरदान से कम भी नहीं। 

   रविवार को फार्म हाउस के मालिक सुशील कंसल, गाजियाबाद से आये समाजसेवी गौरव बंसल ने दर्जनों बच्चों की मौजूदगी में गर्मी के सीजन के लिए गणपत फार्म हाउस को फिर से आम जनता के लिए खोल दिया। यहाँ बने मिनी स्विमिंग पूल में नहाकर तन और मन को शीतलता मिलती है। इस मिनी स्विमिंग पूल में क्षेत्र के बच्चों से लेकर बड़े तक नहाकर आनन्द लेते हैं। इस पानी को बर्बाद न करते हुए खेती में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही यहां कपिला गाय भी पाली जा रही हैं। विभिन्न प्रकार की फसलों की जैविक पद्धति से खेती, आड़ू, आलू बुख़ारा और मौसमी की खेती देखकर मन हरा भरा हो जाता है। पिकनिक स्पॉट के तौर पर यहां एक ट्री हाउस भी बना रखा है। इसके अलावा यहां गाय के गोबर से लीप कर बनाई गई देसी रसोई भी मौजूद है जिसमें आपको चूल्हे की रोटी, मिट्टी की हांडी में पकी सब्ज़ी, तंदूर वाली कुल्हड़ की चाय बनती है। इसके साथ ही यहां सिंदूर के वृक्ष, चंदन के वृक्ष, कमल के फूलों का तालाब और काला अनार भी यहां उगाए गए हैं। यहां के कण कण में समाई मिट्टी की सौंधी खुशबू इंसान के मन मस्तिष्क को तरो ताज़ा करने के लिए काफी है।

     सुशील कंसल ने बताया कि यहां दूर दराज से भी लोग आते रहते हैं। यहां आने वाले लोग प्राकृतिक चीज़ों को नजदीक से जानते हैं और सुकून के पल बिताते हैं। सुशील कंसल ने बताया कि ये सुविधाएं निःशुल्क रहती हैं। जिससे सभी लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिले। 

   गौरव बंसल ने बताया कि शहर में बने कंक्रीट के जंगलों में रहकर मन ऊब जाता है तब यहां प्रकृति की गोद में आकर मन को शांति मिलती है। उन्होंने बताया कि वह अक्सर अपने मित्रों के साथ यहां आते रहते हैं। यहां आकर एक अलग ही अनुभूति होती है।

रिपोर्ट नंद किशोर शर्मा 151170853



Subscriber

188677

No. of Visitors

FastMail

वाराणसी - दिल्ली में खराब मौसम का असर, सुरक्षा कारणों से दो उड़ानें वाराणसी डायवर्ट     वाराणसी - पांच हजार करोड़ से काशी बनेगा सिटी इकोनॉमिक रीजन, कैंट से बाबतपुर तक होगा रोपवे का विस्तार     वाराणसी - काशी विश्वनाथ धाम से मुखनिर्मालिका गौरी और मां विशालाक्षी शक्तिपीठ को भेजा गया उपहार     वाराणसी - काशी विश्वनाथ मंदिर की पहली गंगा आरती छह बजे होगी शुरू, 45 मिनट चलेगी; ललिता घाट पर निहारेंगे लोग     चंदौली - गुब्बारे में हवा भरने वाले गैस सिलिंडर में हुआ ब्लास्ट, दो घायल     चंदौली - निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का स्लैब गिरा, गुणवत्ता पर उठे सवाल, सपा सांसद का धरना