- साल में दो बार लाखों श्रद्धालु करते हैं सूर्य भगवान के दर्शन
- विश्वकर्मा द्वारा एक रात में बने मंदिर की अनोखी मान्यता
- पवित्र तालाब के जल से रोगमुक्त होने की है आस्था
- सोना चुराने पहुंचे अपराधी बने पत्थर, रहस्य से घिरा मंदिर
- देव यात्रा की शुरुआत से जुड़ी पौराणिक कथाएं और मान्यताएं
बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देव सूर्य मंदिर अपनी अद्भुत आस्था और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यह भव्य मंदिर वह पवित्र स्थान है, जहां साल में दो बार लाखों श्रद्धालु सूर्य भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में किया था। देव, देवकुंड और देवघर—इन तीनों स्थानों की अपनी अलग पहचान है, लेकिन देव सूर्य मंदिर का महत्व सबसे विशेष माना जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक बार कुछ अपराधियों ने मंदिर के ऊपर लगे सोने को चुराने का प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे और पत्थर बन गए। इस तरह की मान्यताएं इस मंदिर को और भी रहस्यमयी बनाती हैं।
मंदिर परिसर में स्थित पवित्र तालाब को लेकर भी कई चमत्कारी कथाएं प्रचलित हैं। पुजारियों का कहना है कि यह तालाब साधारण नहीं है, बल्कि त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति किसी रोग से पीड़ित होकर यहां आता है और इस जल का स्पर्श करता है, वह रोगमुक्त हो जाता है।
एक कथा के अनुसार, यहां के राजा ने एक कुष्ठ रोगी को इस तालाब में स्नान करने का आदेश दिया। जब वह व्यक्ति जल में डुबकी लगाकर बाहर निकला, तो उसका रोग दूर हो चुका था। इसके बाद से इस स्थान की महिमा और भी बढ़ गई।
मंदिर परिसर में दो बड़े तालाब हैं, जहां राजा प्रतिदिन स्नान करने आते थे। यह स्थान औरंगाबाद जिले के शिवगंज से पश्चिम लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर, हाईवे से दक्षिण दिशा में स्थित है, जहां से देव यात्रा की शुरुआत होती है।
इस पवित्र स्थल की महिमा और विशेषताओं को लेकर टेकारी थाना चैनल इंचार्ज अजय कुमार सिंह ने मंदिर के पुजारियों से विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने इन अद्भुत मान्यताओं और परंपराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। देखे टेकारी से अजय सिंह की रिपोट

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