मेहंदी रचने से पहले मिट गई भाई की जिंदगी की लकीर; पीलीभीत के सपहा गांव में पसरा सन्नाटा।
पीलीभीत। कहते हैं काल कब, कहाँ और किस रूप में खड़ा हो कोई नहीं जानता। मैलानी थाना क्षेत्र के लालहपुर-चमरपुर के पास जो हुआ, उसने न केवल दो घरों के चिराग बुझा दिए, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है।
गोला-खुटार नेशनल हाईवे पर हुई वह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लोहे की गाड़ियां तो मलबे में बदलीं ही, साथ ही उन अरमानों का भी कत्ल हो गया जो एक भाई अपनी बहन की शादी के लिए सजाए बैठा था। पीलीभीत के थाना सेहरा मऊ उत्तरी के गांव सपहा निवासी विकास राठौर, जो अपने पिता रामबहादुर का इकलौता सहारा और दो बहनों का इकलौता भाई था, 'लगन' की रस्म निभाने निकला था। उसे क्या पता था कि वह अपनी जिंदगी का आखिरी सफर तय कर रहा है।
हादसे के बाद सड़क पर खून बिखरा था और चीखें गूंज रही थीं। दूसरी बाइक पर सवार श्रीकृष्ण की मौके के आसपास ही मौत हो गई, जबकि विकास ने लखनऊ के अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए रविवार शाम दम तोड़ दिया।
26 अप्रैल को जिस घर से बारात का स्वागत होना था, वहां अब अर्थी को कंधा देने की तैयारी है। बड़ी बहन के हाथों में मेहंदी सजने से पहले ही भाई का साया सिर से उठ गया। पूरे गांव में सन्नाटा है और प्रशासन की सड़कों पर सुरक्षा के दावों के बीच एक और हंसता-खेलता परिवार उजड़ चुका है।
"जिस भाई को बहन की डोली उठानी थी, आज उसकी अर्थी देख पूरा इलाका बिलख रहा है। यह महज एक हादसा नहीं, एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों की हत्या है। रिपोर्ट जियाउल हक़ खान पीलीभीत -151173981
