भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने बताया कि आदिगुरु भगवान परशुराम आदिवासियों के उत्थान, शिक्षा और आत्मरक्षा के अग्रदूत हैं। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि आदिगुरु भगवान परशुराम ने आदिवासी समुदायों को न केवल शिक्षा प्रदान की, बल्कि आत्मरक्षा के गुण भी सिखाए, जिससे वे आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकें। भगवान आदिगुरु ने शिक्षा, सुरक्षा और कलरीपायट्टु कला के माध्यम से दक्षिण भारत में वैदिक संस्कृति का व्यापक प्रसार किया। उन्होंने निरक्षर और पिछड़े वर्गों को शिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाया और गैर-परंपरागत अस्त्र-शस्त्रों के उपयोग का ज्ञान भी दिया। आज उनके महान विचारों की आवश्यकता है। हम आदिगुरु भगवान परशुराम के महान आदर्शों को समझें और उनके द्वारा किए गए न्याय, धर्म, शिक्षा, आत्मसुरक्षा, एकता और समाजहित के कार्यों को स्मरण करते हुए उन्हें अपने जीवन में अपनाएं।
उन्होंने कहा कि आदिगुरु भगवान परशुराम जीने भारतीय सनातन समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है। आज आतंकी दुश्मनों से जूझ रहे भारत को आवश्यकता है कि हम आदिगुरु भगवान परशुराम के महान आदर्शों को समझें और उनके द्वारा किए गए न्याय, धर्म, शिक्षा, आत्मसुरक्षा, एकता और समाजहित के कार्यों को स्मरण करते हुए उन्हें अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि आदि गुरु भगवान परशुराम जी के महान विचारों से समाज में एकता, आपसी समरसता और जागरूकता भी विकसित होगी। आज आवश्यकता है कि हम उनके महान प्रेरणादायक पहलुओं को सामने लाएं, जो समाज के हर वर्ग को जोड़ने और आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं।
श्री खुराना ने आगे बताया कि आदिगुरु भगवान परशुराम जी का जीवन हमें कर्तव्यनिष्ठा, न्याय, धर्म और मानवता की सेवा ही प्रेरणा देता है। भलाई करना कर्तव्य नहीं आनंद है, क्योंकि वह तुम्हारे स्वास्थ्य और सुख की वृद्धी करता है, इसलिए सबका भला कीजिए और अपने आदि गुरु से सबके भले की कामना कीजिए। हमें सेवा का मौका और क़ाबलियत उसकी दया मेहर से ही मिलती है। हर एक को यह मौका नहीं मिलता। हो सकता है कि बहुत से लोग सेवा करना भी चाहते हों ,सेवा करने के लिये बेताब हों लेकिन उन्हें कभी मौका ही नहीं मिलता, उनके हालात,उनका माहौल,उनकी घरेलु ज़िम्मेदारियाँ उन्हें सेवा का मौका ही नहीं देती। यह तो उस आदिगुरु की दया मेहर से ही हमें सेवा का मौका मिलता है। भगवान परशुराम की अपार दया मेहर से ही,किसी को सेवा का अवसर प्राप्त होता है। इससे हमें किसी की परख करने का हक नहीं मिलता, सेवा का एकमात्र उददेश्य यह है कि ग़रीब जरूरतमंदों की सेवा पुरे प्यार व असीम नम्रता से की जाये। हमे अपने कार्य व्यवस्थित और अनुकूल वातावरण बनाए रखकर करने चाहिए।
रिपोर्ट नंदकिशोर शर्मा 151170853
