फास्ट न्यूज़ इंडिया उत्तराखंड गदरपुर। उत्तराखंड के सियासी गलियारों में इन दिनों एक 'वायरल पोस्ट' ने ऐसी हलचल मचाई है कि गदरपुर से लेकर दिनेशपुर तक पारा चढ़ा हुआ है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नाम से एक पोस्ट सोशल मीडिया पर क्या तैरने लगी, राजनीतिक पंडितों ने अपनी-अपनी गोटियां फिट करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते बात बंगाली समाज की भावनाओं तक जा पहुँची और नाराजगी के बादल मंडराने लगे। लेकिन जैसे ही मामला गरमाया, गणेश गोदियाल ने खुद मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जिस अकाउंट से यह 'विषैला' ज्ञान बांटा जा रहा है, वह उनका है ही नहीं! गोदियाल ने दो टूक चुनौती देते हुए कहा— "अगर किसी को लगता है कि यह मेरा बयान है, तो उसका ऑडियो या वीडियो प्रमाण दिखाएं।" उन्होंने इसे विरोधियों की एक ओछी साजिश करार दिया, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ समाज में भ्रम फैलाना है। इस विवाद के बीच गदरपुर के पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ढाल बनकर सामने आए। दिनेशपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान महाजन ने जो तेवर दिखाए, उसने साफ कर दिया कि वे अपनों के खिलाफ कोई भी 'फेक नैरेटिव' बर्दाश्त नहीं करेंगे। महाजन ने बड़े ही सधे हुए अंदाज में कहा कि गोदियाल जैसे कद्दावर नेता की छवि बिगाड़ने के लिए उनके शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा गया है। उन्होंने बंगाली समाज को भरोसा दिलाते हुए कहा, "अफवाहों की उम्र लंबी नहीं होती, हमें आपसी सौहार्द बनाए रखना है।" महाजन ने प्रशासन से भी मांग की है कि इस 'डिजिटल फसाद' के पीछे जो भी चेहरा है, उसे बेनकाब किया जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए। इस प्रेस वार्ता में ममता हालदार, त्रिनाथ विश्वास, किशोर हालदार और तारक वछाड़ जैसे प्रमुख लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुटता दिखाते हुए साफ कर दिया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन झूठ के सहारे समाज को बांटने की कोशिश कतई मंजूर नहीं। फिलहाल, गदरपुर की राजनीति में इस 'पोस्ट कांड' ने तड़का तो लगा दिया है, लेकिन सच सामने आने के बाद अब उन लोगों के चेहरे उतरने लगे हैं जिन्होंने इसे हवा दी थी। शाहनूर अली 151045804
