भिण्ड। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लोकसभा सदन में दिनांक 16 17 18 को विशेष नारी शक्ति बंधन अधिनियम के लिए बुलाया जा रहा है यह नारी शक्ति बंधन अधिनियम देश की महिला सशक्तिकरण को मजबूती और महिलाओं का नेतृत्व प्रदान करेगा इसी योजना को लेकर पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कामना भदौरिया ने-भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में,प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नारी शक्ति बंधन अधिनियम का कानून महिलाओं के लिए मिल का पत्थर सबूत होगा जिन्होंने हमारी मातृशक्ति के लिए विचार और उनका नेतृत्व प्रदान करने हेतु जिम्मेदारी सौंपने जा रहे हैं इस आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को भी चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा ताकि वे समाज की सेवा के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को अंतिम छोर तक की महिलाओं तक पहुंचाने का कार्य कर सकेंगे। पत्रकार भाषा में भाजपा जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नरवरिया एवं भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष श्रीमती आभा जैन विशेष रूप से मौजूद थीउन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के नेतृत्व वाली सरकार ने महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का कानून बनाने के लिए लोकसभा में और राज्यसभा में लेकर आए लेकिन कांग्रेस ने इस बिल का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों को रोकने का कार्य किया था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लोकसभा का विशेष शास्त्र बुलाकर इस कानून को लोकसभा पटेल पर रखा राज्यसभा पटेल पर रखा और दोनों सदनों में इसे पास कर महिलाओं के अधिकारों के प्रति नेतृत्व दिया अब आगामी चुनाव में लोकसभा विधानसभा से लेकर के अनेक नगरीय निकाय संस्थाओं तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए विशेष सत्र बुला रहे हैं इसके लिए मैं पत्रकार वार्ता के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करती हूं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती भदौरिया ने जिला कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रेस से चर्चा करते हुए कहा कभी-कभी किसी निर्णय में देश का भाग्य बदलने की क्षमता होती है। हम ऐसे ही निर्णय के साक्षी बन रहे हैं। जिस बात का देश को पिछले कई दशकों से इंतजार था, वो सपना अब साकार हुआ है। ये पूरे देश के लिए बहुत ही खास समय तो है ही, साथ ही यह मातृशक्ति के लिए भी अविस्मरणीय क्षण है।'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' केवल एक कानून नहीं, बल्कि सदियों से प्रतीक्षित उस सामाजिक न्याय की प्रतिज्ञा है जिसे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने धरातल पर उतारा है। यह विधेयक महिलाओं को केवल 'वोट बैंक' समझने वाली मानसिकता को ध्वस्त कर उन्हें नीति-निर्धारण और नेतृत्वकारी भूमिका में बैठाने का ऐतिहासिक काम करेगा। शक्ति वंदन अधिनियम' स्वतंत्र भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है जो हमारी माताओं-बहनों को 'याचक' से 'नायक' की भूमिका में स्थापित करेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती भदौरिया ने कहा कि सालों से संसद की दहलीज पर खड़ी भारत की बेटियों का इंतजार अब खत्म हुआ है,क्योंकि यह अधिनियम उन्हें वह राजनीतिक सामर्थ्य दे रहा है जहां वे स्वयं अपने और देश के भविष्य का फैसला करेंगी। श्रीमती भदौरिया ने कहा कि नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद आयोजित पहले सत्र की शुरुआत ही एतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से हुई थी यानी लोकतंत्र के नए मंदिर का पहला ऐतिहासिक कदम ही भारत की मातृशक्ति को समर्पित रहा। यह इस बात का उद्घोष है कि 'नया भारत' अब अपनी बेटियों के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा।यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस 'गारंटी' का प्रमाण है, जिसने दशकों से राजनीति के हाशिये पर खड़ी भारत की बेटियों को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक अधिकार देकर उन्हें राष्ट्र का भाग्यविधाता बना दिया है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार 2023 के मूल कानून में संशोधन कर रही है ताकि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले पूर्ण परिसीमन चक्र के इंतजार की शर्त को हटाया जा सके। हमारा लक्ष्य है कि 2029 में जब देश नई सरकार चुनेगा, तब संसद के गलियारों में 33 प्रतिशत सीटों पर नारी शक्ति की गूंज सुनाई देगी।हमारी चुनी हुई महिला प्रतिनिधि निसंदेह ही संसदीय बहसों की गुणवत्ता बढ़ाएंगी, कानून और नीति निर्माण को प्रभावित करेंगी और सभी भारतीयों की बेहतरी के लिए शासन में सकारात्मक योगदान देंगी।हमारे लिए यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि महिलाओं को सशक्त बनाने का मतलब एक राष्ट्र को सशक्त बनाना है। जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो समाज समृद्ध होता है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम नए भारत की नई लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का उद्घोष है। यह बहुत बड़ा और मजबूत कदम है। ये अमृतकाल में सबका प्रयास से विकसित भारत के निर्माण की तरफ बड़ा कदम है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि महिला विरोधी कांग्रेस-कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण के नाम पर देश की आंखों में धूल झोंकी है। उनके लिए यह विधेयक केवल चुनावों के घोषणापत्र का पन्ना मात्र था जिसे उन्होंने कभी नीयत के साथ लागू नहीं किया। कांग्रेस को जवाब देना होगा कि जिस देश ने उन्हें दशकों तक पूर्ण बहुमत और निर्बाध सत्ता सौंपी, संसद में उस देश की महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाए?महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली कांग्रेस का इतिहास ही यह रहा है कि उन्होंने हमेशा आधी आबादी के अधिकारों को अपने राजनीतिक स्वार्थ और सहयोगियों के दबाव की वेदी पर चढ़ाया है। सतीश शर्मा 151171363
