गौ माता के सेवा के पावन उद्देश्य को समर्पित वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना सुबह गोमाताओं को स्नेहपूर्वक आहार प्रदान कर उनकी सेवा करते है। गोमाताओं को भूसा-गुड़ की सेवा करते हुए गौ सेवक राजेश खुराना ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति की मूल भावना है और गोमाता की सेवा करना मानवता की सच्ची सेवा है। गऊ माता की सेवा ही सनातन संस्कृति की आत्मा हैं, गौ माता की जय। सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन-दर्शन में गौमाता का स्थान सर्वोपरि है। गौ सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि मानव जीवन के कल्याण का आधार है।
इस दौरान उन्होंने पद्मपुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के उद्धरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि गौ सेवा ही सनातन संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने बताया कि पद्मपुराण के अनुसार मन, वचन या कर्म से गाय को पीड़ा पहुँचाने वाले व्यक्ति को दीर्घकाल तक कठोर दंड भोगना पड़ता है। भारत में गौ माता सेवा और वैदिक परंपराओं की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि शुद्ध देसी गाय के घी से वेद मंत्रों के साथ वज्ञ किए जाएं, तो परमाणु रेडिएशन जैसे खतरों से भी बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि पंचगव्य में ऐसी शक्ति है, जो वातावरण को शुद्ध करने में सहायक होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भोपाल गैस त्रासदी जैसे हादसों के दौरान जिन घरों में गौमाता की सेवा की जाती थी, वहां के लोगों पर प्रभाव अपेक्षाकृत कम पड़ा। उन्होंने बताया कि आज विदेशों में भी देसी गोवंश की सेवा पर जोर दिया जा रहा है। ब्राजील और अफ्रीकी देशों में बड़े स्तर पर गौपालन किया जा रहा है, जो भारतीय सनातनी परंपरा की महत्ता को दशार्ता है।
उन्होंने कहा कि बालक के सर्वश्रेष्ठ विकास के लिए मां का दूध और गौमाता का दूध दोनों ही अमूल्य हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गाय को अपना स्वरूप बताया है और जब तक पूरे भारत में गोवंश सेवा थी, तब तक देश 'सोने की चिड़िया' और 'विश्व गुरु' कहलाता था। उन्होंने समाज में बदलती जीवनशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि लोग अब गाय की जगह कुत्ते पालने लगे हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति या तो घर में गाय का पालन करे यदि घर में स्थान कम है तो गौशाला में गोद लेकर सेवा करे, जिससे दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिल सकती है।
गौ सेवक राजेश खुराना ने आगे कहा कि भगवान स्वयं प्रत्येक युग में गौ रक्षा और गौ सेवा के उद्देश्य से अवतार लेते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अवतार भी इसी उद्देश्य से हुआ था। उन्होंने बताया कि भगवान राम के पूर्वज महाराज दिलीप महान गौभक्त थे, जिन्हें गौमाता की निष्ठापूर्वक सेवा के फलस्वरूप संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि गाय केवल दूध देने वाला पशु नहीं, बल्कि मानव की समस्त इच्छाओं की पूर्ति का साधन है। गौमाता की कृपा से संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। बाल्यावस्था में गाय दूध देकर जीवन का पोषण करती है और वृद्धावस्था में अपने रोम-रोम से आशीर्वाद प्रदान करती है।
श्री खुराना ने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें गोविंद नाम गायों के मध्य निवास करने के कारण ही प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि गौमाता के शरीर में तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, और केवल गौ सेवा व पूजा से समस्त देवी-देवताओं की सेवा का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सभी देवी-देवताओं ने गौमाता के शरीर में स्थान ग्रहण किया, तब विलंब से आने के कारण गंगा माता को भी गौमाता में ही स्थान लेना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौमाता के बिना गौरी-गणेश का पूजन अधूरा माना जाता है।
अपने वक्तव्य के अंत में राजेश खुराना ने कहा कि जिस स्थान पर गौमाता खड़े होकर प्रसन्नतापूर्वक रंभाती है, वहाँ की नकारात्मक ऊर्जा स्वतः समाप्त हो जाती है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से गौ सेवा, और गौ सम्मान को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का भावपूर्ण आह्वान किया। उन्होंने सभी ने एक स्वर में गौसेवा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
रिपोर्ट नंदकिशोर शर्मा 151170853
