बयाना- उपखण्ड क्षेत्र के झील का बाड़ा कैला देवी माता मंदिर में आयोजित प्रसिद्ध लक्की मेले के समापन के बाद पूरे क्षेत्र की स्थिति बेहद चिंताजनक और अव्यवस्थित हो गई है। मेले के दौरान देवस्थान विभाग द्वारा दुकानों की नीलामी से लाखों रुपए की भारी कमाई की गई, लेकिन मेले के बाद सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है। नतीजतन, पूरा परिसर कूड़ा-करकट और दुर्गंध से भर गया है। जानकार लोगों का कहना है कि मेले में एक-एक दुकान 4 से 5 लाख रुपए तक में आवंटित की गई थी। इसके बावजूद मेले के समापन के बाद न तो सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई और न ही कचरा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नजर आई। मंदिर परिसर, मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में कूड़े के ढेर लगे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति आस्था के केंद्र रवि कुंड की है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद मुंह धोते हैं। वर्तमान में यह कुंड कीचड़ और सड़ी गंदगी से भरा हुआ है। हवा चलते ही पत्तल, दोने और भोजन के अवशेष उड़कर श्रद्धालुओं के कपड़ों और शरीर पर गिरते हैं, जिससे वातावरण और अधिक असहनीय हो गया है। भारतीय किसान यूनियन अंबावता के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र सिंह कसाना ने देवस्थान विभाग और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मेले से पूर्व ही अधिकारियों को सफाई व्यवस्था को लेकर अवगत कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के श्रद्धालु हर रविवार, अमावस्या और पूर्णिमा को बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें अब आस्था के बजाय गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों के भीतर पूरे क्षेत्र की समुचित सफाई नहीं करवाई गई तो मुख्यमंत्री एवं जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरने पर कैला देवी धाम परिसर में धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता को भी उजागर कर रही है।
