पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआचाफी गांव में पशु तस्करी का विरोध करने पर छात्र दीपक गुप्ता की अपहरण के बाद हत्या के मामले में एसटीएफ ने एक और आरोपी को बिहार के धनहा से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शिवम तिवारी (23) के रूप में हुई है, जो गिरोह का सक्रिय गुर्गा है। पुलिस ने कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब उसे रिमांड पर लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पुलिस के अनुसार, शिवम तिवारी पश्चिम चंपारण (बिहार) जिले के धनहा थाना क्षेत्र के ग्राम तुनियहवां का निवासी है। वह कुख्यात जवाहिर और राजीव गिरोह से जुड़ा है। वह लंबे समय से वांछित था। गोरखपुर एसटीएफ प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह के नेतृत्व में टीम ने सर्विलांस की मदद से उसे धनहा से गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि शिवम पहले एक जनरल स्टोर की दुकान चलाता था। जल्द रुपये कमाने की चाहत में वह अपराध की दुनिया में उतर गया। इसी दौरान वह जवाहिर और राजीव के संपर्क में आया और पशु तस्करी की धंधेबाजी से जुड़ गया।
एसटीएफ की जांच में यह भी पता चला कि इस पूरे नेटवर्क में 20 से 25 लोगों की संलिप्तता है। अब तक दो आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके है, जबकि छह अभी भागे हुए हैं। एसटीएफ उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
गिरफ्तार आरोपी शिवम तिवारी की भूमिका घटना के बाद भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, मामला शांत पड़ने के बाद वह वारदात में इस्तेमाल की गई पिकअप गाड़ी को पहचान छिपाने के उद्देश्य से धनहा में ही डेंटिंग-पेंटिंग कराने के लिए मिस्त्री के पास ले गया था।
इसी दौरान एसटीएफ ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर उसे दबोच लिया और पिकअप वाहन भी बरामद कर लिया। इसके बाद आरोपी को पिपराइच पुलिस के हवाले कर दिया।
वारदात के वक्त पिकअप में मौजूद था शिवम
पुलिस के मुताबिक, 15 सितंबर 2025 को हुई वारदात के दिन शिवम तिवारी, जवाहिर और अन्य साथियों के साथ महुआचाफी इलाके में पशु तस्करी के इरादे से पहुंचा था। इसी दौरान दीपक गुप्ता ने उनका विरोध किया, जिस पर आरोपियों ने उसे जबरन पिकअप वाहन में अगवा कर उसकी हत्या कर दी थी।
घटना सामने आते ही पूरे गांव में आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने पशु तस्करों की घेराबंदी की थी, जिसमें एक पकड़ लिया गया था। हालांकि बाद में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना ने न सिर्फ गोरखपुर बल्कि आसपास के जिलों में भी कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। डीजीपी के निर्देश पर इसकी विवेचना एसटीएफ को सौंपी गई थी।
बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी एसटीएफ ने दी दबिश
एसटीएफ ने जांच संभालते ही तेजी से कार्रवाई शुरू की। घटनास्थल की बारीकी से जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वाहनों की आवाजाही, पुराने आपराधिक मुकदमों और स्थानीय संपर्कों की गहन पड़ताल की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दीपक की हत्या कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि पशु तस्करी से जुड़े एक संगठित गिरोह की सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी।
एसटीएफ की टीम ने गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर समेत कई जिलों में लगातार दबिश दी। साथ ही बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी दबिश देकर नेटवर्क से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई।
चार आरोपियों के खिलाफ दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
एसटीएफ मामले में अब तक चार आरोपियों छोटू, रामलाल, राजू और रहीम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इन चारों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भिजवाया जा चुका है। शेष 13 आरोपियों की भूमिका को लेकर विवेचक साक्ष्य एकत्र करने में जुटे हुए हैं। जांच के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक फैले संगठित पशु तस्करी नेटवर्क की कई परतें खुलकर सामने आई हैं।
रिपोर्टर फूलमती मौर्य 151188511
