डीएम ज्ञानेंद्र सिंह का कड़ा निर्देश— 'एक भी पात्र किसान मुआवजे से न छूटे', लेखपालों को निष्पक्ष सर्वे की दी हिदायत
पीलीभीत। जिले में पिछले दिनों हुई बेमौसम भारी बारिश और ओलावृष्टि ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी फसलें बिछ गई हैं और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। संकट की इस घड़ी में जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। गुरुवार को खुद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कमान संभाली और प्रभावित क्षेत्रों का तूफानी दौरा कर जमीनी हकीकत जानी।
सड़क से नहीं, खेतों के बीच जाकर देखा नुकसान
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का एक अलग ही संवेदनशील रूप देखने को मिला। वे केवल सड़क से मुआयना कर नहीं लौटे, बल्कि खुद जूते उतारकर गीले और कीचड़ भरे खेतों में उतर गए। जलमग्न फसलों के बीच खड़े होकर उन्होंने नुकसान की गंभीरता का आकलन किया। उनके साथ पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्रा और एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह भी मौजूद रहीं।
प्रशासनिक अमले ने न्यूरिया, राजा कॉलोनी और मुख्तियार कॉलोनी जैसे सर्वाधिक प्रभावित इलाकों का दौरा किया। यहां भारी जलभराव के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। डीएम ने किसानों से सीधा संवाद किया और उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा घबराइए मत, प्रशासन आपके साथ है और आपको हर संभव मदद दिलाई जाएगी।"
जिलाधिकारी ने मौके पर ही लेखपालों और राजस्व अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि जिले के प्रत्येक गांव में पारदर्शिता के साथ सर्वे किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र किसान तकनीकी कारणों से सहायता से वंचित न रहे।
डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रकृति की मार ने किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुंचाई है। उन्होंने बताया पूरे जिले में राजस्व टीमों को लगा दिया गया है। जैसे ही नुकसान का सटीक आंकड़ा सामने आएगा, रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाएगी ताकि जल्द से जल्द किसानों के खातों में मुआवजे की राशि पहुंच सके।प्रशासन की इस सक्रियता से प्रभावित किसानों में थोड़ी उम्मीद जगी है, हालांकि अब सबकी नजरें सर्वे की निष्पक्षता और मुआवजे की राशि पर टिकी हैं। रिपोर्ट जियाउल हक़ खान -151173981
