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हनुमान जी रुद्रावतार हैं, उनके स्मरण मात्र से होता है कल्याण: धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे
  • 151019049 - VISHAL RAWAT 65 76
    02 Apr 2026 19:06 PM



फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। जनपद प्रतापगढ़ स्थित रामानुज आश्रम में हनुमत जयंती के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं भव्य आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने उपस्थित जनसमूह को हनुमत जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान हनुमान रुद्रावतार हैं और वे ज्ञानियों में अग्रगण्य, परम जितेंद्रिय तथा गुणों की खान हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के परम प्रिय भक्त हैं और कलयुग में उनके नाम स्मरण मात्र से ही जीवों का कल्याण संभव है।धर्माचार्य ने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति “राम ते अधिक राम कर दासा” का उल्लेख करते हुए कहा कि हनुमान जी की भक्ति स्वयं भगवान राम से भी श्रेष्ठ मानी गई है। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम का अवतार हुआ, उसी दिव्य प्रसाद के प्रभाव से हनुमान जी का जन्म माता अंजनी के गर्भ से पवन देव की कृपा से हुआ, जिससे उनका भगवान श्रीराम से विशेष संबंध स्थापित होता है।उन्होंने हनुमान जी के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि बाल्यकाल में उन्होंने सूर्य को अपने मुख में धारण कर लिया था, जिससे संपूर्ण संसार में अंधकार छा गया। इंद्र के वज्र प्रहार से उनकी ठोड़ी प्रभावित हुई, जिसके कारण उनका नाम ‘हनुमान’ पड़ा। बाद में ब्रह्मा जी ने उन्हें पुनर्जीवित कर अजर-अमर होने का वरदान दिया, जबकि माता सीता ने भी उन्हें चिरंजीवी होने का आशीर्वाद प्रदान किया।धर्माचार्य ने कहा कि हनुमान जी सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं और जहां कहीं भी राम कथा होती है, वहां उनकी उपस्थिति अवश्य मानी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतापगढ़ से भी हनुमान जी का विशेष संबंध रहा है। लंका विजय के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौट रहे थे, तब उन्होंने हनुमान जी को केवट को संदेश देने के लिए भेजा था। इस दौरान हनुमान जी ने बकुलाही नदी पार कर रामनगरा क्षेत्र होते हुए भरत जी से भेंट की थी।कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने हनुमान जी के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। धर्माचार्य ने सभी से हनुमान जी की सेवा और भक्ति में लीन रहने का आह्वान किया, जिससे जीवन के सभी कष्ट दूर होकर सुख-शांति की प्राप्ति हो सके। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049



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