फास्ट न्यूज़ इंडिया मध्य प्रदेश जनपद पंचायत पिछोर का शासकीय परिसर इन दिनों हरियाली के बजाय विवादों का केंद्र बन गया है। वर्षों से खड़े महुआ और अन्य छायादार पेड़ों पर अचानक आरा चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया गया। ये वही पेड़ थे जो न सिर्फ पर्यावरण संतुलन बनाए रखते थे बल्कि परिसर की पहचान भी थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महुआ जैसे संरक्षित वृक्षों की कटाई पर शासन का स्पष्ट प्रतिबंध है, इसके बावजूद बिना किसी अनुमति के खुलेआम पेड़ों की कटाई की गई। इससे साफ है कि या तो नियमों की अनदेखी की जा रही है या फिर जिम्मेदारों की मिलीभगत से यह सब हो रहा है।
मामले को और गंभीर बनाता है शासकीय भूमि पर हुआ अवैध निर्माण। पहले मंदिर बनाया गया, फिर उसे बाउंड्री बनाकर घेर लिया गया और अब उसी के नाम पर लगातार निर्माण कार्य जारी है। इस निर्माण के चलते लगातार हरियाली खत्म की जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि जनपद पंचायत की जमीन पर न सिर्फ अवैध मंदिर खड़ा किया गया है, बल्कि कुछ लोगों ने कार्यालय के कमरों पर भी कब्जा जमा लिया है। हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक का यहां आना-जाना लगा रहता है, लेकिन किसी ने अब तक इस पर कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि शासकीय भूमि पर धार्मिक निर्माण नहीं किया जा सकता, फिर भी पिछोर में इन आदेशों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है।
जब इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत सीईओ नरेंद्र नरवरिया से सवाल किया गया तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और पेड़ किसने काटे, यह भी वे नहीं जानते। उन्होंने यह तक कह दिया कि मंदिर के पुजारी से पूछ लिया जाए। संवाददाता राजू जाटव पिछोर
