वृन्दावन। गोपीनाथ बाजार स्थित श्री कृष्ण कली पीठ में विगत लगभग 50 वर्षों से निरंतर चल रहे नवरात्रि महोत्सव के उपलक्ष्य में वर्तमान वासंतिक नवरात्रि में विगत 19 मार्च से विश्व कल्याणार्थ विशाल शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ मां कृष्णा काली के सानिध्य में प्रारंभ हो चुका है। जिसका समापन आगामी 28 मार्च 2026 को 108 कन्या पूजन, बटुक पूजन, सुवासिनी पूजन, पूर्णाहुति एवं भंडारा प्रसाद के साथ होगा।
श्रीकृष्ण काली पीठाधीश्वर डॉ. केशवाचार्य महाराज ने बताया कि श्रीधाम वृन्दावन का अति प्राचीन स्थल श्रीकृष्ण काली पीठ केशीघाट पर स्थित है। जहां मां का स्वयंभू प्रकट चतुर्भुजी कसौटी शिला का अचल विग्रह विद्यमान है एवं गोपीनाथ बाजार में मां कृष्ण काली का चल विग्रह विद्यमान है।ब्रज की आराध्या श्रीराधा रानी के प्रेम एवं अनन्य गोप पर कृपा करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने काली रूप धारण किया एवं स्वयं श्रीकृष्ण ब्रज वृन्दावन में श्रीकृष्ण काली के रूप में प्रकटित हुए।
उन्होंने बताया कि पूर्व में माता सती के केश यहां गिरे, इसलिए इस स्थान का नाम केश घाट था। किंतु बाद में जब भगवान श्रीकृष्ण ने केशी दैत्य का उद्धार किया, तभी से यह स्थल केशीघाट के रूप में प्रसिद्ध हुआ।जहां केश गिरे वही स्थल अद्यावधि श्रीकृष्ण काली पीठ के रूप में केशीघाट पर विद्यमान है।दुर्गा सप्तशती में भगवती के 108 नामों में मां कृष्ण काली को "पुरुषाकृति" नाम से उल्लिखित किया गया है।कालांतर में मां कृष्ण काली का चल विग्रह गोपीनाथ बाजार में विराजमान है।
जो भक्त मां के दर्शन हेतु मंदिर में आते हैं उनकी मनोकामना की पूर्ति, वंश की वृद्धि, संतान की प्राप्ति, दुख, कष्ट, दरिद्रता से मुक्ति एवं सुख समृद्धि की पूर्ति होती है। कलयुग में यह स्थल माता की साधना, आराधना एवं भटके हुए मानव के शीघ्र संकल्पों की पूर्ति का स्थल है। रिपोर्ट नन्द किशोर शर्मा 151170853
