हाल ही में NIA (नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी) ने एक ऐसे विदेशी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार इराक, सीरिया और यूक्रेन की जंग से लेकर अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA तक जुड़े होने का अंदेशा है।
कौन है मैथ्यू वैनडाइक और क्या है पूरा मामला?
13 मार्च को NIA ने कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ से 7 विदेशियों को हिरासत में लिया। इनमें मुख्य नाम है मैथ्यू वैनडाइक (अमेरिकी नागरिक) और उसके साथ 6 यूक्रेनी नागरिक।
बड़ी बातें जो आपको जाननी चाहिए:
ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए, गुवाहाटी पहुंचे और फिर अवैध तरीके से मिजोरम के उन प्रतिबंधित इलाकों में घुस गए जहां भारतीयों को भी परमिट (PAP) की जरूरत होती है। आरोप है कि इन्होंने म्यांमार के विद्रोही गुटों को यूरोप से लाए गए घातक ड्रोन और युद्ध की ट्रेनिंग दी।
मैथ्यू एक पूर्व भाड़े का सैनिक (Mercenary) है। हालांकि वह आधिकारिक तौर पर CIA में नहीं है, लेकिन उसने खुद माना है कि वह CIA की भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा रहा है और उसके साथी अमेरिकी रक्षा विभाग में ऊंचे पदों पर हैं। जानकारों का मानना है कि एजेंसियां ऐसे 'कॉन्ट्रैक्टर' का इस्तेमाल 'प्रॉक्सि वार' के लिए करती हैं।
🗺️ 'ईसाई देश' बनाने की साजिश?
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों और बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बंगाल की खाड़ी, म्यांमार और भारत के नॉर्थ-ईस्ट के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक अलग 'ईसाई राष्ट्र' बनाने की कोशिशें चल रही हैं (ठीक वैसे ही जैसे पूर्वी तिमोर बनाया गया था)। मैथ्यू को इसी बड़े प्लान का एक 'मोहरा' माना जा रहा है।
मिजोरम के सीएम लालदुहोमा ने भी विधानसभा में माना था कि जून से दिसंबर 2024 के बीच करीब 2,000 विदेशी आइजोल पहुंचे, जिनमें से कई संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे।
म्यांमार में जारी गृहयुद्ध और भारत की सीमा पर इन विदेशी 'ट्रेनर्स' की मौजूदगी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग है। हालांकि भारत सरकार और NIA ने अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन यह मामला वैश्विक राजनीति के गहरे और खतरनाक खेल की ओर इशारा करता है।
आपकी क्या राय है? क्या विदेशी ताकतें भारत के नॉर्थ-ईस्ट में अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं? कमेंट्स में बताएं।
