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ग्वालियर के महल गांव में विराजमान करौली माता मंदिर: 125 वर्षों से अटूट आस्था का केंद्र
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जब करौली से ग्वालियर पहुँची माता: चमत्कारों की अनोखी कहानी
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महल गांव का पावन धाम: जहाँ माता रानी स्वयं प्रकट होकर विराजमान हुईं
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भक्तों की आस्था का केंद्र बना करौली माता मंदिर, 125 सालों से चमत्कार जारी
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स्वप्न में दिए दर्शन और ग्वालियर में हुई स्थापना: करौली माता की अद्भुत कथा
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सिंधिया राजघराने से जुड़ा पावन स्थल: करौली माता मंदिर की विशेष महिमा
फास्ट न्यूज़ इंडिया की ओर से सभी भारतवासियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज हम आपको आस्था और श्रद्धा के एक ऐसे पावन स्थल के दर्शन कराते हैं, जहाँ माता रानी पिछले लगभग 125 वर्षों से विराजमान हैं।
यह दिव्य धाम ग्वालियर के महल गाँव में स्थित करौली माता मंदिर है। मान्यता है कि करौली से माता रानी ने यहाँ के पुजारी को स्वप्न में दर्शन दिए और स्वयं को ग्वालियर लाकर स्थापित करने का आदेश दिया। तभी से माता रानी यहाँ विराजमान हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।
इस मंदिर का गहरा संबंध ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजघराने से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि ग्वालियर के महाराज पर भी माता रानी की विशेष कृपा रही है, और यही कारण है कि यह मंदिर महल क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिससे गाँव का नाम “महल गाँव” पड़ा।
आज भी दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से माता की आराधना करता है, उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है—ऐसी गहरी आस्था लोगों के दिलों में बसी हुई है।
हम आपको मंदिर के पुजारी परिवार से भी मिलवाते हैं, जिनका संबंध सिंधिया राजपरिवार से बताया जाता है और जो सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
आप भी कभी ग्वालियर जाएँ, तो इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें—जहाँ आस्था, इतिहास और चमत्कार का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। देखे राजेश शिवहरे की रिपोट
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