एक गाँव में दो सयाने (समझदार बुज़ुर्ग) रहते थे। उनके घर में एक योग्य युवक था और वे उसके लिए ऐसी बहू ढूँढना चाहते थे जो बुद्धिमान, संस्कारी और काम-काज में निपुण हो। वे सोचते थे कि घर संभालने के लिए केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि समझदारी भी बहुत जरूरी होती है।
एक दिन दोनों सयाने बहू की तलाश में दूसरे गाँव की ओर निकल पड़े। चलते-चलते वे एक छोटे से घर के पास पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि आँगन में एक लड़की चूल्हे पर बैठकर खाना बना रही थी। वह बड़े ध्यान से रसोई का काम कर रही थी। उसका व्यवहार शांत और सादगी भरा था।
दोनों बुज़ुर्गों को वह लड़की पहली ही नजर में पसंद आ गई। लेकिन वे यह भी जानना चाहते थे कि लड़की केवल काम-काज में ही निपुण है या सचमुच बुद्धिमान भी है। इसलिए उन्होंने उसकी परीक्षा लेने का निश्चय किया।
एक सयाने ने मुस्कराकर लड़की से पूछा,
“बेटी, तेरी माता कहाँ गई है?”
लड़की ने आदरपूर्वक उत्तर दिया,
“वह एक की दो करने गई हैं।”
दोनों सयाने थोड़े चकित हुए, पर उन्होंने अगला प्रश्न किया।
दूसरे सयाने ने पूछा,
“अच्छा, तेरे पिता कहाँ गए हैं?”
लड़की ने शांत स्वर में कहा,
“वे पानी पकड़ने गए हैं।”
अब बुज़ुर्गों की उत्सुकता और बढ़ गई। उन्होंने तीसरा प्रश्न किया,
“और तेरा भाई कहाँ गया है?”
लड़की बोली,
“वह पागल खाने गया है।”
अब सयाने मुस्कराने लगे। उन्हें लगा कि यह लड़की कुछ अलग ही ढंग से बातें कर रही है।
फिर उन्होंने पूछा,
“और तुम क्या कर रही हो बेटी?”
लड़की ने हँसते हुए कहा,
“मैं सौ मार रही हूँ और एक को परख रही हूँ।”
दोनों सयाने उसकी बात सुनकर एक-दूसरे की ओर देखने लगे। अब उन्हें समझ में आ गया कि यह लड़की सचमुच बहुत बुद्धिमान है।
लड़की ने विनम्रता से उन्हें बैठने के लिए चटाई बिछा दी और बोली,
“आप दोनों बैठिए, अभी घर वाले भी आ जाएँगे।”
दोनों बुज़ुर्ग आराम से बैठ गए और मन ही मन उसकी बातों का अर्थ समझने लगे।
कुछ देर बाद उन्होंने आपस में विचार किया और लड़की के उत्तरों का मतलब समझ लिया।
लड़की ने जो कहा था—“माता एक की दो करने गई हैं”—उसका अर्थ यह था कि उसकी माता उड़द की दाल पीसने या दलने गई थी, जिसमें एक दाना दो भागों में हो जाता है।
“पिता पानी पकड़ने गए हैं” का मतलब था कि उसके पिता घर की छत या छप्पर को ठीक करने गए हैं, ताकि बारिश का पानी अंदर न आए।
जब लड़की ने कहा कि “भाई पागल खाने गया है”, तो उसका अर्थ यह था कि उसका भाई शराब पीने गया है, क्योंकि शराब पीने के बाद आदमी पागलों जैसा व्यवहार करने लगता है।
और जब लड़की ने कहा कि “मैं सौ मार रही हूँ और एक को परख रही हूँ”, तो उसका मतलब था कि वह चावल पका रही है। चावल पकते समय एक दाना निकालकर देखकर पता लगाया जाता है कि सारे चावल पक गए हैं या नहीं।
अब दोनों सयानों को पूरा विश्वास हो गया कि यह लड़की केवल काम-काज में ही कुशल नहीं, बल्कि बहुत तेज बुद्धि वाली भी है।
दोनों बुज़ुर्गों की आँखें मिलीं और वे मुस्करा उठे। उन्होंने मन ही मन तय कर लिया कि यही लड़की उनके बेटे के लिए सबसे अच्छी बहू होगी।
अब वे सोचने लगे कि जब लड़की के माता-पिता घर आएँगे, तो उनसे बात करके आज ही इस रिश्ते को पक्का कर दिया जाए।
दोनों सयानों ने आपस में परामर्श किया और निश्चय किया कि ऐसी समझदार और गुणवान लड़की मिलना बहुत कठिन होता है।
इस प्रकार उस बुद्धिमान लड़की की समझदारी ने ही उसे एक अच्छे घर की बहू बनने का अवसर दिला दिया।
शिक्षा:
सच्ची बुद्धिमानी केवल पढ़ाई में नहीं, बल्कि व्यवहार और समझदारी में भी दिखाई देती है।
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