बानमोर सिविल अस्पताल तक पहुंचना बना चुनौती, दबंगों के कब्जे से मरीज परेशान
मध्य प्रदेश । बानमोर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बने तीन मंजिला सिविल अस्पताल का उद्देश्य क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था। हालांकि, अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता ही अब मरीजों के लिए बड़ी समस्या बन गया है।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल तक जाने वाली लगभग 30 फुट चौड़ी सड़क पर स्थानीय दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। सड़क पर बिजली के पोल डालकर और जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बनाकर रास्ते को करीब 5 फुट तक सीमित कर दिया गया है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि झटकों के कारण कई गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में प्रसव करना पड़ रहा है। चार पहिया और दो पहिया वाहनों का आवागमन भी बेहद मुश्किल हो गया है। यदि किसी वाहन का हल्का सा संपर्क भी इन कब्जाधारियों के चबूतरों से हो जाए, तो वे मरीजों और उनके परिजनों से विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं।
इसके अलावा, सड़क पर पशु बांधकर और गोबर के ढेर लगाकर रास्ते को और बाधित कर दिया गया है, जिससे स्थिति और भी बदतर हो गई है।
सिर्फ रास्ता ही नहीं, अस्पताल के अंदर भी संसाधनों की भारी कमी है। हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों के लिए यहां एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मरीजों को लगभग 2 किलोमीटर दूर नूराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है, जहां पहुंचने से पहले ही कई बार गंभीर मरीज दम तोड़ देते हैं।
अस्पताल में पिछले एक वर्ष से एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनें ऑपरेटर की कमी के कारण बंद पड़ी हैं।
इस संबंध में नूराबाद के बीएमओ डॉ. गिर्राज गुप्ता ने बताया कि एमएलसी सुविधा और अन्य संसाधनों की कमी के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। देखे राजेश शिवहरे की रिपोट
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