फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसायटी के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छा मृत्यु की अनुमति देने के बाद परिवार में आंखों आंगन सूना होने का गम साफ नजर आया। क्वाड्रिप्लेजिया (100 प्रतिशत दिव्यांगता) से पीड़ित हरीश राणा की 4586 दिन तक सेवा करने में माता-पिता के साथ उनके छोटे भाई आशीष राणा ने भी कसर नहीं छोड़ी।
आशीष सुबह साढ़े चार बजे उठकर हरीश की फिजियोथेरपी में लग जाते थे। इसके बाद उनकी दवा और कपड़े आदि की देखरेख करने में सहयोग करते थे। इसके बाद ड्यूटी के लिए खुद तैयार होते थे और ड्यूटी से आने के बाद भी अपने भाई की सेवा में लग जाते थे। दिन भर माता-पिता घर देखरेख करते थे।
अशोक राणा के परिवार में पत्नी निर्मला देवी, बेटा हरीश राणा व आशीष राणा और एक बेटी है। पूर्व में आशोक राणा परिवार के साथ दिल्ली महावीर एन्क्लेव में उनका तीन मंज़िला में रहते थे। बेटा हरीश 2013 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक फाइनल ईयर का छात्र था। 20 अगसत 2013 में रक्षाबंधन था। इस दिन उनके बेटे हरीश ने शाम 6:30 बजे अपनी बहन से बात की थी।
एक घंटे बाद उन्हें खबर मिली कि उनका बेटा उनके पेइंग गेस्ट(पीजी) की चौथी मंजिल से गिर गया। बेटे के इलाज के लिए उन्होंने अपना दिल्ली का मकान सितंबर 2021 में बेच दिया। जिसके बाद वह गाजियाबाद, राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसायटी में शिफ्ट हो गए थे। सभी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए। हरीश सांसें चल रही हैं, लेकिन वह 2013 से जिंदा लाश की तरह बिस्तर पर है।
क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हरीश का शरीर पूरी तरह से निष्क्रिय है। उसे यूरिन बैग लगा हुआ है और ट्यूब के जरिए खाना दिया जाता है। उन्होंने हरीश की इच्छा मृत्यु के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आठ जुलाई 2024 को हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी थी।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। उनके केस को मनीष जैन से निश्शुल्क पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरीश राणा की इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी। पूर्व में पिता बेटे के अंगदान करके दूसरो को नई जिंदगी देने की इच्छा जताई थी।
13 वर्ष सेवा करना नहीं था आसान
अशोक राणा बेटी की शादी कर चुके हैं। 20 अगस्त 2013 से 11 मार्च 2026 तक यानी 4586 दिन और रातें काटना परिवार के लिए आसान नहीं था। भाई आशीष नौकरी के साथ सुबह साढ़े चार बजे उठना और ड्यूटी से आने के बाद फिर से भाई की सेवा में लग जाना आसान नहीं था। वह ताज सेट्स एयर केटरिंग से रिटायर हुए हैं और उन्हें हर महीने करीब 3,500 रुपये पेंशन मिलती है। सेवानिवृत्त होने के बाद वह घर पर रहते हैं।
वर्तमान में वह घर ही फास्ट फूड बनाते थे और पास के स्टेडियम बेचते थे। वह अपनी और दूसरे बेटे की कमाई का ज्यादातर हिस्सा अपने हरीश के इलाज और देखरेख पर खर्च करते थे। उन्होंने 27,000 रुपये प्रति माह पर एक नर्स रखी थी। दवाओं पर भी हर माह 20 से 25 हजार रुपये खर्च होते थे।
अस्पतालों ने तोड़ी उम्मीद
उन्होंने हरीश का इलाज पीजीआइ चंडीगढ़, एम्स, आरएमएल, लोक नायक, अपोलो और फोर्टिस जैसे अस्पतालों में करवाया लेकिन किसी अस्पताल से उन्हें ठीक होने की उम्मीद नहीं मिली। अब निष्क्रिय इचछा मृत्यु के लिए हरीश को एम्स ले जाया जाएगा। एम्स में डाक्टर उनकी फूड पाइप को निकालेंगे। डाक्टरों की निगरानी में उसे पानी के सहारे रखा जाएगा। इसके बाद हरीश भगवान की इच्छा के मुताबिक अपने प्राण त्याग देगा। रिपोर्ट मोहित गुप्ता 151022222
