गोंडा बलरामपुर मार्ग पर बाबा जय गुरुदेव आश्रम पर होली के उपलक्ष में उमाकांत महाराज जी का सत्संग कार्यक्रम आयोजित
इटियाथोक / गोण्डा में 03 मार्च 2026 को प्रातः काल के सतसंग में कहा कि जो पश्चिम में प्रांत है भारत देश का, राजस्थान! वहां के लोगों को जगह-जगह पर साधना शिविर लगवानी पड़ेगी। जगह-जगह पर लगवाओ वहां पर 'जयगुरुदेव' नामध्वनि ज्यादा करवानी पड़ेगी क्योंकि वहां के लोगों को बचाना है। सतसंगियों को बचाना है, अपने परिवार वालों को, रिश्तेदारों को बचाना है।और साथ ही जिनके साथ व्यापार करते हो, जिनके साथ उठते-बैठते हो, नौकरी करते हो, खेती में जिनकी जरूरत पड़ती है, ऐसे प्रेम-मोहब्बत के लिए ऊठा-बैठी करते हो, पड़ोस हो, गांव के हो; उनको भी बचाना है।
लेकिन बचेंगे कैसे? उनके लिए पहले आफत आएगी। उनके लिए हवा पहले जहरीली हो जाएगी। और अगर आपने नहीं किया प्रेमियों और लोग आपकी बात पर विश्वास नहीं किये तो ऊंट के ऊपर सामान लाद-लाद करके रातों-रात गाँव खाली करना पड़ेगा। बीमारियां बहुत फैल जाएंगी। हवा जहरीली हो जाएगी।कहां से ये हवा जहरीली होगी? वो जो जहरीली गैस आएगी उधर पश्चिम से, दक्षिण के कोने से जो आएगी, जगह-जगह पर उसके बादल बन जाएंगे और मालूम पड़ेगा कि जैसे बादल जगह-जगह पर होता है, चकत्ते-चकत्ते दिखाई पड़ते हैं, स्पॉट दिखाई पड़ता है, ऐसे दिखाई पड़ेगा और उसी से जहर नीचे बरसेगा। वो नीचे नहीं उतरेगा लेकिन ऊपर से हवा उसको लाएगी। बहुत मरेंगे। लाशों पर लाशों का होगा नजारा, सुनते तो जाओ संदेश हमारा और यह सबसे पहले राजस्थान में हमको मालूम हो रहा है, महसूस हो रहा है कि वहां से होगा, वहीं से शुरुआत होगी। और वो आंधी-आफत वो कहां तक जाएगी? मान लो दुश्मनी हो गई पड़ोसी देश से और उसने कीटाणु बम छोड़ा, तो कीड़े आयेंगे वो काटेंगे तो लोग मरेंगे, बीमारी फैलेगी और वो कहां तक जाएगी? उसका कोई भरोसा नहीं है। लेकिन आप अगर साधना और नामध्वनि करोगे-करवाओगे, साधना शिविर अगर लगाओगे तो गुरु के पास मारने वालों से ज्यादा बचाने का दांव है, गुरु बचा लेंगे।
गुरु के पास बचाने का बहुत बड़ा उपाय है
गुरुजी के पास युक्ति है, उपाय है। कीटाणुओं को, जहर को हवा उधर से लाएगी। अब अगर पश्चिम की हवा तेजी से चली और जल्दी फैलाने लग गई, तो गुरु पूरब की आंधी चला देंगे और फिर वो वापस होकर उन्हीं के पास पहुँच जाएगा। जो दूसरे का बुरा चाहता है वही उसमें फंस जाएगा। अपने ही बनाए हुए जाल में फंस जाएगा। तो गुरु के पास बचाने का बहुत बड़ा दांव है।
अब आप ये सोचो कि हम तो उधर असम में, मेघालय में रहते हैं, जब ये कीड़े वहां पहुंचेंगे तब ही ऐसा हो पाएगा। जब हवा जहरीली हो जाएगी तभी तो हम मरेंगे। अरे! कहां की हवा जहरीली हो जाए, कोई भरोसा नहीं है।
हवा कैसे जहरीली होती है? विष कैसे फैलता है? ये जो बम गिर रहे हैं, ये जो धड़ाधड़ धमाका हो रहा है, ये जो धरती फट रही है, उससे ज्वाला निकल रही है रिपोट - पवन कुमार 151051049
20260303191743129581858.mp4
