वाराणसी । काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को वैश्विक शिक्षा, कौशल एवं रोजगार अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से “प्रवासन गतिशीलता पर सहयोग एवं संवाद” विषयक छात्र जनजागरूकता एवं सूचना कार्यशाला का सफल आयोजन 27 फरवरी 2026 को प्रातः 8.30 बजे से 12 बजे के मध्य मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के सभागार में किया गया। यह कार्यक्रम विदेश मंत्रालय, भारतीय विश्व परिषद, यूरोपीय संघ, व अंतरराष्ट्रीय प्रवासन नीति विकास केंद्र सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत में विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हम सदैव इस विश्वास के साथ आगे बढ़े हैं कि शिक्षा भौगोलिक सीमाओं में बंधी नहीं होती। हमारे संस्थापक, भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना ऐसे संस्थान के रूप में की थी, जहाँ भारतीय संस्कार और वैश्विक ज्ञान का संगम हो।"
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, सुरक्षित वैश्विक गतिशीलता और विद्यार्थियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूक और सूचित प्रवासन ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय विश्वभर से विद्यार्थियों का स्वागत करता है और वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना के साथ संपूर्ण विश्व की सेवा करने के अपने ध्येय को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री जीना उइका ने सुरक्षित, नियमित और वैध प्रवासन मार्गों की महत्ता स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को अनियमित प्रवासन से जुड़े जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल की प्रथम सचिव सुश्री वेरोनिका लिस्कोवा ने यूरोप में शिक्षा एवं शोध अवसरों की जानकारी दी, जबकि इटली दूतावास के प्रतिनिधि यूजेनियो बोर्तोलुसी ने छात्र गतिशीलता से जुड़े प्रक्रियात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
आईसीएमपीडी की भारत समन्वयक डॉ. सुरभि सिंह ने वैध गतिशीलता प्रक्रियाओं, दस्तावेज़ीकरण तथा सुरक्षित प्रवासन तंत्र पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की राष्ट्रीय परियोजना समन्वयक सुश्री राधिका सुंगर तथा कौशल विशेषज्ञ श्री गैब्रियल बोरदादो ने सुरक्षित श्रम गतिशीलता, कौशल मानकीकरण और वैश्विक रोजगार अवसरों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। यूरोपीय संघ प्रतिनिधिमंडल के अनुसंधान एवं नवाचार सलाहकार श्री किन्च्ट बिहानी तथा यूनि-इटालिया एसोसिएशन के प्रतिनिधि अरकप्रभा बिस्वास ने उच्च शिक्षा एवं शोध सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त निदेशक (रोजगार) श्री पी. के. पुंडीर ने रोजगार परिदृश्य एवं कौशल उन्मुख तैयारी पर मार्गदर्शन दिया, जबकि गाज़ियाबाद के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी श्री वैभव आर्य ने पासपोर्ट, दस्तावेज़ सत्यापन तथा आवेदन प्रक्रिया से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। आईसीएमपीडी के परियोजना अधिकारी अमीन अरिम्ब्रा तथा आईसीडब्ल्यूए की शोध सहयोगी यशना अग्रवाल ने प्रवासन सहायता संसाधनों एवं नीति दृष्टिकोण पर विद्यार्थियों को अवगत कराया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं वैध अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता से संबंधित उपयोगी संसाधन एवं सहायता सामग्री भी साझा की गई, जिससे उन्हें विदेश में शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने में सहूलियत मिले।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. उमेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विदेश मंत्रालय, भारतीय विश्व मामलों की परिषद, यूरोपीय संघ तथा अंतरराष्ट्रीय प्रवासन नीति विकास केंद्र के प्रतिनिधियों सहित सभी गणमान्य अतिथियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेल से जुड़े स्टूडेंट प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन में दिए गए अथक योगदान की सराहना की। लगभग 250 पंजीकृत विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद, सक्रिय सहभागिता और सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।। रविन्द्र गुप्ता
