काशी के प्रख्यात देवेन्द्र जी महाराज ने रंगभरी एकादशी एवं अमालकी एकादशी का शुभकामना संदेश दिया एवं महत्त्व बताते हुए कहा रंगभरी एकादशी, काशी में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। यह फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इसे 'आमलकी एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। उदया तिथि के अनुसार 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को अमला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसी दिन रंगभरी एकादशी भी मनाई जाएगी। रंगभरी एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि विवाह के पश्चात भगवान शिव जब पहली बार अपनी प्रिय नगरी काशी आए, तो नगरवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया था। इसी स्वागत की परंपरा आज भी रंग और गुलाल के साथ निभाई जाती है। परंपराओं के अनुसार, इस अवसर पर शिव-पार्वती का अभिनंदन फूलों और अबीर-गुलाल से किया जाता है। यह रंगों और भक्ति का यह उल्लास लगभग छह दिनों तक चलता है।रंगभरी एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। विवाह के बाद परंपरा के अनुसार गौना होता है और गौना में नववधू अपने पति के घर आती है। रंगभरी एकादशी को माता पार्वती पहली बार बाबा विश्वनाथ के गृह (काशी) आती हैं। इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती का भव्य स्वागत होता है और उन पर गुलाल और रंग अर्पित किए जाते हैं।
काशी विश्वनाथ धाम में इस दिन से होली उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को गुलाल, अबीर और रंगों से सजाया जाता है। भक्तों की विशाल शोभायात्रा निकलती है, जिसमें लोग नृत्य, भजन और रंगों के साथ भाग लेते हैं। यह एकमात्र एकादशी है जो भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव से भी जुड़ी है। रंगभरी एकादशी केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह दांपत्य प्रेम, भक्ति और जीवन में आनंद के स्वागत का प्रतीक है। इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में मधुरता आने की मान्यता है।आमलकी एकादशी का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आमलकी के वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन और सुख मिलते हैं और पापों से मुक्ति भी मिलती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का भी ध्यान करते हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख तथा सौभाग्य की कामना करती हैं। काशी में इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे मोक्ष की नगरी माना जाता है।
