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भारत को अपने अस्तित्व को बचाना है तो आरक्षण शब्द को ही हटाना होगा और यह दायित्व सर्व समाज का है - देवेन्द्र जी महाराज।
  • 151114592 - DEVENDRA CHATURVEDI 0 0
    24 Feb 2026 15:55 PM



काशी के प्रख्यात देवेन्द्र चतुर्वेदी जी महाराज ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा आरक्षण का वास्तविक अधिकारी गरीब है और शोषित समाज है, भारत को अपने अस्तित्व को बचाना है तो आरक्षण शब्द को ही हटाना होगा और यह दायित्व सर्व समाज का है हमारे पिछड़ा वर्ग के भाइयों को यह राजनैतिक दल के लोगों ने विकलांग बना करके अपना वोट कि रोटी सेंकने का कार्य कर रहें हैं लोग हम सब एक है और समान ही कठिन से कठिन मेहनत करके सब कुछ हासिल कर सकते है। आरक्षण की व्यवस्था का प्रावधान वंचित और शोषित लोगों को आगे बढ़ाने और उनके उत्त्थान के लिए था। ये व्यवस्था 70+ वर्षों से जारी है तब भी अधिकांश लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नही मिला। ऐसा क्यों ?? इतने वर्षों से आरक्षण अनवरत जारी है और समय समय पर इसमे वृद्धि ही हुई है तब भी समाज में ना तो जातिगत समानता आ रही है और ना ही इसके लाभार्थियों में कमी। दरअसल आरक्षण की सोच तो सही है किंतु एक राजनीतिक विषय होने के कारण इसका कभी भी इत्मीनान से समीक्षा नही की गयी। साल दर साल इसमें जाति और वर्गों का समावेश तो होता रहा किन्तु अभी तक शायद हि कोइ वर्ग इससे बाहर आया हो। आज केवल कुछ वर्ग विशेष ही इस आरक्षणक लाभ उठा रहे है जबकि आवश्यक उन लोगो को है जो अभी तक इसके लाभ से पूर्ण वंचित है एक जाति वर्ग के विशेष समूह ही बार बार इस व्यवस्था का लाभ उठा रहा है और अन्य साथियों को इससे वंचित रख रहा है। उदाहरण के तौर पे कोई आरक्षित जाति का व्यक्ति इसका लाभ लेते हुए अच्छा पद, प्रतिष्ठा, पैसा प्राप्त कर ले रहा है और अपने बच्चो को अच्छे स्कूल कॉलेज में पड़ा रहा है, और दूसरी तरफ कोई अन्य आरक्षित वर्ग का व्यक्ति जिसे किसी भी कारण से लाभ न मिला तो उसका बच्चा किसी अच्छे स्कूल से पढ़ नही पाया। इस स्थिति में दोनों बच्चो में जमीन आसमान का अंतर है और जब वे किसी कॉलेज में एडमिशन लेगे तो ज्यादा अवसर है कि वही बच्चा आगे निकले जिसके पिताजी इस व्यवस्था का फायदा ले चुके है और जो स्वयं अच्छे स्कूल से अच्छी शिक्षा ले चुका है और ऐसा ही नौकरी लेते वक्त भी होगा।SC/ST/OBC वर्ग में कुछ जाति विशेष और व्यक्ति विशेष ही व्यवस्था का लाभ उठा रहे है और इसका लाभ अन्य लोगो को पास नहीं कर रहे है। इन्ही लोगों की वजह से ये व्यवस्था पंगु साबित हो रही है। अभी कुछ ही वर्ष पहले Upsc द्वारा आयोजित सिविल परीक्षा में एक प्रतियोगी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। अब विडंबना दखिये उनके माता पिता और अन्य परिवार के लोग A क्लास सरकारी नौकरी में है। वे सभी बहुत बढ़िया स्कूल और कॉलेज से पढ़े है, जहाँ से शिक्षा प्राप्त करना एक सामान्य बच्चे के लिए सिर्फ ख्याली पुलाव ही हो। अब देखिए उनकी तुलना किसी सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों से तो छोड़िए उन्ही के जाति विशेष के उन लोगो से कीजिए जिन्हें अब तक कोई ऐसा लाभ नही मिला, माता पिता सामान्य नौकरी में है तो क्या इस स्थिति में वो बच्चा कम्पटीशन कर पाएगा। शायद नहीं, और यहीं इस व्यवस्था का फेलियर है। पिछले तो छोड़िए आगे भी शायद इनके बच्चे ऐसे ही इसका लाभ उठाते रहेंगे और अपने ही जाति के अन्य का हक मारते रहेंगे। सभी सरकार इतनी निक्कमी और नालायक है कि वोट बैंक के लिए कभी भी इस व्यवस्था की समीक्षा नही कर पाई और एक हद तक लाभ पा चुके लोगों को न ही इस से अलग रख पायी मेरे अनुसार आरक्षण को समाप्त न करके इसके लाभ को उन वर्गों तक पहुचाने की जरूरत है जो इससे पूर्णतः अनभिज्ञ है और इसका किंचित मात्र भी लाभ न ले सके है। सरकार को उन लोगों को चिन्हित करना चाहिए जो इसका लाभ पीढ़ी दर पीढ़ी ले रहे है। और उन्हें इस आरक्षण से अलग करके और समूह को मौका देना चाहिए। अगर आरक्षण वर्तमान रूप में ही जारी रहा तो इस व्यवस्था को कितना भी लंबा खींच लीजिए कभी भी ये अपने उद्देश्य में सफल नही होगी और तो और ये भविष्य में जातिगत घृणा का कारण भी बन सकती है।

 



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