मध्य प्रदेश के भिंड जिले के इंगुरी गांव में राजावत परिवार द्वारा श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा वाचन प्रसिद्ध कथा वाचक रजनीश जी महाराज के मुखारविंद से हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में उपस्थित होकर कथा रस का आनंद ले रहे हैं।
कथा के तीसरे दिन बुधवार को महाराज श्री ने भक्त प्रह्लाद की प्रेरणादायक कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भक्त प्रह्लाद राक्षस राजा हिरण्यकश्यप का पुत्र था। हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि वह न किसी अस्त्र-शस्त्र से मारा जाए, न दिन में, न रात में, न धरती पर, न आकाश में। इस वरदान के बाद वह स्वयं को अजेय समझने लगा और देवताओं को कष्ट देने लगा।
महाराज श्री ने कहा कि राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद प्रह्लाद बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था। हिरण्यकश्यप ने अनेक बार उसे मृत्यु देने का प्रयास किया—कभी पर्वत से गिरवाया, कभी विष देने का आदेश दिया—किन्तु हर बार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की। अंततः भगवान ने नृसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रह्लाद की अटल भक्ति की विजय हुई।
महाराज श्री ने कहा कि सच्ची भक्ति से परमात्मा को प्रसन्न किया जा सकता है और श्रद्धा व विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर सरस्वती विद्या बिहार स्कूल के संचालक विकास त्रिपाठी ने कथा वाचक रजनीश जी महाराज का फूलमाला पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया।
कथा महोत्सव में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। देखे भिंड से कपिल त्रिपाठी की रिपोर्ट
विजुअल

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