वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान में 9 से 13 फरवरी 2026 तक “पेस्ट जीनोमिक्स: कृषि कीट एवं रोगजनकों के आणविक लक्षणन हेतु उपकरण एवं तकनीक” विषय पर पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन 9 फरवरी 2026 को संस्थान के सेमिनार हॉल में हुआ।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के निदेशक प्रो. यू. पी. सिंह रहे, जबकि आईसीएआर–आईएआरआई, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस. सुब्रमण्यम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संयोजक प्रो. राम केवल, सह-संयोजक प्रो. राम चंद्र तथा आयोजन सचिव डॉ. श्रीनिवास एन. ने की। सह-आयोजन सचिव के रूप में प्रो. आर. एस. मीणा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. विनोद कुमार एस. एवं डॉ. जॉर्बेन जे. ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजकों ने बताया कि वर्ष 2024 में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया के आधार पर इस बार कार्यक्रम की अवधि पाँच दिन रखी गई, ताकि शोधार्थियों को अधिक गहन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। यह कार्यशाला अपनी विशिष्ट संरचना के कारण विशेष रही, जिसमें जीनोमिक्स से संबंधित मूलभूत प्रयोगात्मक तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के लिए पंजीकरण खुलते ही 30 दिनों के भीतर 60 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कीट विज्ञान एवं पादप रोग विज्ञान विषयों के एम.एससी. एवं पीएच.डी. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को प्राथमिकता देते हुए प्रतिभागियों का चयन किया गया। सभी चयनित प्रतिभागियों ने अपने-अपने विभागाध्यक्षों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में देश के 11 प्रमुख विश्वविद्यालयों—जैसे जी.बी. पंत कृषि विश्वविद्यालय, आरपीसीएयू पूसा, नागालैंड विश्वविद्यालय, सीएसएयूएटी कानपुर, एनडीयूएटी अयोध्या, आनंद कृषि विश्वविद्यालय (गुजरात)—के शोधार्थियों सहित नेपाल के राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण हेतु संसाधन व्यक्तियों को आईएआरआई नई दिल्ली, आईआईवीआर वाराणसी, एनबीएआईएम मऊ, आईआईएसआर लखनऊ, बायोकार्ट इंडिया तथा बीएचयू के कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान एवं आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभागों से आमंत्रित किया गया।
प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित कर छोटे-छोटे बैचों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रत्येक प्रतिभागी को निकट पर्यवेक्षण एवं बेहतर सीखने का अवसर मिल सके। कार्यशाला में डीएनए एवं आरएनए निष्कर्षण, आणविक निदान, सूक्ष्मजीव विविधता विश्लेषण, कीटनाशी प्रतिरोध के आणविक तंत्र तथा नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की ।। रविन्द्र गुप्ता
